राममनोहर सिंह दांगी व ऋतुराज सिंह चौहान माधव बाल निकेतन एवं वृद्ध आश्रम पहुंचे

Feb 11 2021

ग्वालियर। गुरूवार को अचानक जज ऋतुराज सिंह चौहान सर और माननी जज राममनोहर सिंह दांगी का आगमन माधव बाल निकेतन एवं वृद्ध आश्रम पर हुआ आदरणीय ऋतुराज सर का आगमन माधव बाल निकेतन में चल रहे वृद्ध आश्रम के बारे में जानकारी लेने एवं वहां पर रह रहे वृद्ध जनों के लिए न्यायालयीन प्रक्रिया में जो नियम वृद्धजनों के लिए माननीय न्यायालय द्वारा बनाए गए हैं उनके बारे में वृद्ध जनों एवं संस्था के चेयरमैन नूतन श्रीवास्तव,उपाध्यक्ष श्रीमती इंदिरा मंगल,  सचिव सुनील श्रीवास्तव,  सह सचिव श्री मनोज दुबे अधीक्षिका सीमा सक्सेना, संचालक श्याम श्रीवास्तव, श्रीमती रजनी कुशवाह तथा संस्था के सभी कर्मचारियों को बताया. माननीय जज साहब श्री ऋतुराज सिंह चौहान सर द्वारा संस्था में रह रहे वृद्धों से उनके हालचाल और वृद्ध आश्रम में रहने का कारण पूछने पर संस्था में रह रहे वृद्धों की आंखों से अश्रु धारा बह चली क्योंकि इस युग की कलयुगी संतानों और बहुओं के सताने के कारण उन्हें वृद्ध आश्रम में रहना पड़ रहा है आश्रम में रह रहे वृद्ध घनश्याम जोकि वन विभाग में अस्थाई रूप से नौकरी करते थे रिटायरमेंट के बाद जो उन्हें पैसा मिला उस पैसों को लेने के लिए उनके लड़के उन्हें निरंतर परेशान करते रहते थे क्योंकि उनके बच्चों ने बहुत ज्यादा कर्ज भी ले रखा था जिसे पटाने के लिए भी वे निरंतर अपने पिता के ऊपर दबाव बनाए रहते थे. उनके द्वारा बताया गया कि उनकी पत्नी आज भी मजबूरी वश उनके बनाए हुए घर में रह रही है और आए दिन बच्चे और बहू के ताने सुन रही हैं. लेकिन घनश्याम जी के ऊपर इनका बेटा बहुत ज्यादा दबाव बनाता था इसलिए इन्हें अपना स्वयं का खून पसीने की कमाई से बनाया हुआ घर छोड़कर आज वृद्ध आश्रम में रहना पड़ रहा है 

संस्था में रह रही एक अन्य वृद्धा राधा रानी से जब उनके हाल के बारे में और वृद्ध आश्रम आने के कारण माननीय जज साहब द्वारा पूछे गए तो उनकी आंखों से भी अश्रु धारा बह निकली और इसके पीछे जो कारण था वह यह था कि मेहनत और पसीने की कमाई से बनाया हुआ लगभग एक करोड रुपए का मकान कुछ ही रुपयों में उनके बेटे और बहू द्वारा भेज दिया गया जिसमें उनके बेटी दामाद का भी हाथ था वर्तमान में भी उनकी बेटी दामाद उनके ऊपर पैसों के लिए काफी दबाव बनाते हैं एक बेटा जो कि कुछ समय पूर्व छत से गिर गया था और गिरने के कारण मृत्यु हो गई थी वृद्धा राधा रानी  बेटे के शोक से  उबर भी नहीं पाई थी  की  दूसरे बेटे और उसकी बहू ने मेहनत और खून पसीने की कमाई से बनाए हुए मकान को चंद रुपयों की खातिर बेच दिया जिस से दुखी और व्यथित होकर वृद्धा राधा रानी को वृद्ध आश्रम की शरण लेना पड़ी
माननीय जज साहब के द्वारा वृद्धों की व्यथा सुनने के बाद वृद्ध घनश्याम के पक्ष में निर्णय लेने और उन्हें न्याय दिलाने के लिए आश्वासन दिया और कहा की मकान और आपके कमाए हुए धन पर सिर्फ और सिर्फ आपका अधिकार है यदि आपके बेटे बहू बेटी दामाद किसी भी प्रकार से उक्त संपत्ति को आप लोगों की अनुमति के बगैर नहीं ले सकते और यदि वे इस प्रकार की कार्यवाही के लिए अपने वृद्ध माता-पिता पर दबाव बनाते हैं या बनाने का प्रयास करते हैं तो इसके लिए ऐसे कलयुग में पुत्रों को या पुत्रियों को जेल में डालने का प्रावधान भी है