भागवत कथा में रुमणी का हुआ मंगल विवाह

Feb 07 2021

ग्वालियर। माधव बाल निकेतन एवं वृद्ध आश्रम कमानी पुल के पास लक्ष्मीगंज में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में कथावाचक पंडित घनश्याम शास्त्री महाराज ने श्रीकृष्ण-रुमणी विवाह प्रसंग सुनाया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण-रुमणी विवाह को एकाग्रता से सुना। श्रीकृष्ण-रुमणि का वेश धारण किए बाल कलाकारों पर भारी संया में आए श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।श्रद्धालुओं ने विवाह के मंगल गीत गाए। 
प्रसंग में शास्त्री ने कहा कि रुमणी विदर्भ देश के राजा भीष्म की पुत्री और साक्षात लक्ष्मी का अवतार थी। रुमणी ने जब देवर्षि नारद के मुख से श्री-कृष्ण के रूप, सौंदर्य एवं गुणों की प्रशंसा सुनी तो उसने मन ही मन भगवान श्रीकृष्ण से विवाह करने का निश्चय किया। रुमणी का बड़ा भाई रुमी श्रीकृष्ण से शत्रुता रखता था और अपनी बहन का विवाह राजा दमघोष के पुत्र शिशुपाल से कराना चाहता था।
रुमणी को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने एक ब्राह्मण संदेशवाहक द्वारा श्रीकृष्ण के पास अपना परिणय संदेश भिजवाया। तब श्रीकृष्ण विदर्भ देश की नगरी कुंडीनपुर पहुंचे और वहां बारात लेकर आए शिशुपाल व उसके मित्र राजाओं शाल्व, जरासंध, दंतवत्र, विदु रथ और पौंडरक को युद्ध में परास्त करके रुमणी का उनकी इच्छा से हरण कर लाए। वे द्वारिकापुरी आ ही रहे थे कि उनका मार्ग रुमी ने रोक लिया और कृष्ण को युद्ध के लिए ललकारा। तब युद्ध में श्रीकृष्ण व बलराम ने रुमी को पराजित करके दंडित किया। तत्पश्चात श्रीकृष्ण ने द्वारिका में अपने संबंधियों के समक्ष रुमणी से विवाह किया। भागवत आरती में नूतन श्रीवास्तव मौजूद रहे। 
आज कार्यक्रम में मुख्य रूप से ग्वालियर सांसद विवेक नारायण शेजवलकर, राकेश माहोर, जय सिंह कुशवाह, लाल टिपारा संत बिशेषवानंद महाराज, अशोक निगम, अवधेश श्रीवास्तव, विनय जैन, बृज मोहन श्रीवास्तव, धर्मेंद्र यादव, विष्णु श्रुति, पंकज गुप्ता, दिनेश दीक्षित, धर्मेंद्र राणा विशेष रूप से उपस्थित थे।