निजीकरण के विरोध में बिजली अधिकारी-कर्मचारी लामबंद काम बंद कर जताया विरोध, सुबह से की नारेबाजी

Feb 03 2021

ग्वालियर। अब तक बेहद सादगी से बिजली कंपनी के निजीकरण का विरोध कर रहे कंपनी के अधिकारी और कर्मचारियों ने बुधवार को काम का टोटल बहिष्कार कर जमकर विरोध जताया और बजाए दफ्तर के भीतर जाने के बाहर खड़े होकर अपनी मांग पूरी करने के लिए नारेबाजी की।
इसका एलान वह तीन दिन पहले ही जन जागरण के साथ कर चुके थे और जब उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो फिर वह काम करने की चेतवनी पर अमल करते दिखे। इसके चलते आज न तो फॉल्ट होने पर बिजली सुधारी गई, न ही बिल जमा हुए, बल्कि हड़ताल के साथ सारा कामकाज जाम हो गया। इस दौरान तमाम लोग अपने काम कराने के लिए बिजलीघरों पर पहुंचते रहे, लेकिन उन्हें बैरंग ही वापस लौटना पड़ा। शहर और ग्रामीण दोनों ही जगह किसी कर्मचारी ने काम नहीं किया, बल्कि सरकार को अल्टीमेटम दिया कि मांगें नहीं मानी गईं तो फिर आंदोलन को और गति दी जाएगी। इसके बाद कर्मचारी सात को भोपाल में भी जबरदस्त प्रदर्शन की घोषणा पहले ही कर चुके हैं। 
इमरजेंसी सेवाएं रहेंगी जारी
हड़तालरत कर्मचारियों का कहना है कि भले ही वह काम बंद हड़ताल कर रहे हैं, लेकिन मानवीय पहलू को मद्देनजर रखते हुए इमरजेंसी सेवाएं देंगे, जिसमें मुख्य रूप से अस्पताल, सरकारी दफ्तर आदि शामिल हैं। कहीं अन्य फॉल्ट आने पर वह काम नहीं करेंगे।
निजीकरण के साथ पांच मांगें
आंदोलनरत बिजली कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा एक मत होकर निजीकरण व पांच अन्य मांगों के साथ आंदोलन का पूरा खाका तैयार कर लिया है और अब वह इसी पर अमल कर रहे हैें। इस बार वह आश्वासन की जगह ठोस निर्णय चाहते हैं। इसी विरोध की दूसरी कड़ी में बुधवार को काम का बहिष्कार करेंगे, जबकि इससे पहले वह जनजागरण कर चुके हैं। वहीं सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन की भी तैयारी है। कर्मचारियों की मुख्य मांगों में केंद्र शासन द्वारा विद्युत वितरण कंपनियों के निजीकरण के लिए जारी स्टैंडर्ड बिट डॉक्यूमेंट को मध्य प्रदेश में लागू नहीं किया जाए एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा ट्रांसमिशन कंपनी के निजीकरण के लिए शुरू टीवीसीवी को वापस लिया जाए। मध्य प्रदेश में कार्यरत सभी विद्युत संविदा अधिकारी-कर्मचारियों को आंध्र प्रदेश एवं बिहार शासन की तरह नियमित किया जाए, सभी वर्गों के बाहरी स्रोत कर्मचारियों की सेवाओं को सुरक्षित रखते हुए तेलंगाना, दिल्ली एवं हिमाचल प्रदेश की तरह सीमाएं सुरक्षित की जाएं, राज्य विद्युत मंडल के कर्मचारियों की पेंशन की सुरक्षित व्यवस्था करते हुए उत्तर प्रदेश शासन की तरह गारंटी लेकर पेंशन ट्रेजरी से शुरु की जाए। विद्युत अधिकारी, कर्मचारियों के सभी वर्गों की वेतन विसंगति जैसे को समाप्त किया जाए। कंपनी कैडर के नियमित एवं संविदा कर्मचारियों को भी 50 प्रतिशत विद्युत छूट एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पूर्व की भांति 25 प्रतिशत विद्युत छूट की दी जाएं। साथ ही मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थगित किए गए वार्षिक वेतनवृद्धि को चालू कर बकाया राशि का भुगतान किए जाने की मांगें शामिल हैं।