गुरु गोविंद सिंह का प्रकाश पर्व लंगर में , दो गज दूरी पर बैठाया जाएगा श्रद्धालुओं को

Jan 16 2021

ग्वालियर। गुरु गोविंद सिंह का प्रकाश पर्व आज से मनाया जाएगा। इस अवसर पर आज रविवार को नगर कीर्तन निकाला जाएगा। नगर कीर्तन में सबसे आगे महिलाएं और बच्चे साफ सफाई करती हुई चलेंगे और पीछे पुरुष सफाई करेंगे।
नगर कीर्तन में कोविड नियमों का पूरी तरह से पालन किया जाएगा। इसको लेकर फूलबाग गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी ने तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं। फूलबाग गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष एचएस कोचर ने बताया कि नगर कीर्तन में आने वाले श्रद्धालुओं को बिना मास्क के प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
श्री कोचर ने बताया कि नगर कीर्तन में एक विशेष वाहन रहेगा जो लोगों को सेनेटाइज करने के साथ मास्क भी वितरण करेगा। नगर कीर्तन में श्रद्धालुओं को उचित दूरी रखकर चलाया जाएगा। नगर कीर्तन में सबसे आगे एक विशेष वाहन चलेगा जो लोगों के हाथ सेनेटाइज कराएगा और उन्हें मास्क वितरित करेगा। नगर कीर्तन में शामिल सभी श्रद्धालुओं को गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी द्वारा मास्क वितरित किए जाएंगे। 
श्री कोचर ने बताया कि इस बार कोरोना को देखते हुए श्रद्धालुओं को लंगर में दो-दो गज दूरी पर बैठाकर प्रसादी वितरित की जाएगी। इस बार नए बने हॉल में श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरित की जाएगी। नया हॉल 5 हजार वर्गफीट में बनाया गया है। इसके अलावा अंचल भर से आने वाले श्रद्धालुओं को सिर ढंकने के कपड़े के साथ मास्क भी वितिरित किए जाएंगे। गुरुद्वारा में होगा कीर्तन गुरु गोविंद सिंह की जयंती सप्तमी तिथि बुधवार को प्रकाश पर्व के रुप में मनाई जाएगी। नगर कीर्तन रविवार दोपहर 2 बजे फूलबाग गुरुद्वारा से शुरू होगा। नगर कीर्तन नदीगेट, घोड़ा चौक, ऊंट पुल, पाटनकर बाजार, छप्परवाला पुल, शिंदे की छावनी, एमएलबी रोड होता हुआ रात 8 बजे फूलबाग गुरुद्वारा पहुंचेगा। नगर कीर्तन में पंच प्यारे घोड़ों पर सवार होकर चलेंगे। गुरु गोविंद सिंह जी पालकी भी सजाई जाएगी। 18 जनवरी से अखंड पाठ शुरू होगा। 
पटना साहिब में हुआ था जन्म
आचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि गुरु गोविंद सिंह का जन्म पौष माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को 1666 में पटना साहिब में हुआ था। उनके पिता का नाम गुरु तेग बहादुर और माता का नाम गुजरी था। गुरु गोविंद सिंह ने जीवन जीने के पांच सिद्धांत दिए हैं जिन्हें पंच ककार कहा जाता है। ये पांच चीजें हैं- केश, कड़ा, कृपाण, कंघा और कच्छा। गुरु गोबिंद सिंह जी बेहद ही निडर और बहादुर योद्धा थे। उन्होंने धर्म की रक्षा के लिए मुगलों से लड़ते हुए पूरे परिवार का बलिदान कर दिया।