गलन और ठिठुरन से सुन्न हो गए हाथ-पैर

Jan 15 2021

ग्वालियर। कमजोर ठंड पर टिप्पणी करने वालों पर जोरदार सर्दी भारी पडऩे लगी है। शुक्रवार को तो जिस तरह से शहर में गलाव और ठिुठरन बढ़ी उसके बाद तो हाथ-पार सुन्न हो गए। भले ही रात के पार में कल की अपेक्षा 0.7 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज हुई, लेकिन बर्फीली हवा ने अपना वर्चस्व न सिर्फ कायम रखा, बल्कि इसमें और इजाफा हुआ, जिससे जनजीवन पूरी तरह जाम हो गया। इस सर्दी के सीजन में ठंड का अहसास कमजोर ही रहा था, कभी पश्चिमी विक्षोभ तो कभी नमी के बढ़ जाने के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी के बावजूद भी शहर में सर्द हवा प्रवेश नहीं कर पा रही थी, पारा लगातार दहाई के आंकड़े पर था, लेकिन बीते चार दिन से इसमें जबरदस्त गिरावट के साथ ही हालात बिगड़ते चले गए, वहीं आज धूप खिलने के बाद भी सर्दी की इंतहा हो गई।
रात में कड़ी ठंड झेलने के बाद सुबह जब जागे तो आसमान पर गहरी धुंध होने से एसा लगा नहीं कि आज सूर्य के दर्शन होंगे। ऐसे में मौसम ने लोगों को डराने का काम किया, जहां कुछ सोगों ने ऐसे हालात देखे तो फिर रजाई से मुंह ढांक लिया। वहीं जिन्हे सुबह बाहर निकलना मजबूरी था, वह नहाने का विचार त्याग कर मोटे गर्म कपड़े पहनकर घर से निकले, लेकिन ठिठुरन ने पीछा नहीं छोड़ा। गर्म कपड़ों के भीतर भी हड्ड्यिों तक पर ठंड वार करती रही। लगभग साढ़े आठ बजे सूरज ने दर्शन दिए तो फिर लोगों की जान में जान आई। हालांकि खुले क्षेत्र में धूप में खड़ा होना भी दुश्कर था, जितनी धूप की तपन राहत नहीं दे पा रही थी, उससे अधिक परेशानी सर्द हवा दे रही थी। तब जनजीवन ठप सा हो गया, सड़कों पर इक्का-दुक्का वाहन और पैदल लोग ही दिखाई दिए। दस बजे के बाद ही जनजीवन कुछ सामान्य हुआ, लेकिन सर्दी ने फिर भी पीछा नहीं छोड़ा।
दोपहर से पहले ही धूप निकल आने से लोगों में ऊर्जा का संचार होता है, वहीं दोपहर को तेज धूप के कारण सर्दी का अहसास बेहद कम हो जाता है, लेकिन सूर्य के अस्ताचल की ओर रवाना होते ही सर्दी का सितम वापसी करता है, तब लोग जल्दी ही घरों में घुस जाते हैं और सात बजे तक तो बाजार और सड़कों पर गहमा-गहमी लगभग खत्म हो जाती है।