तानसेन समारोह में तानसेन संगीत कला केन्द्र के कलाकारों ने बांधा समा

Dec 30 2020

ग्वालियर। तानसेन समारोह की आठवीं संगीत सभा संगीत सम्राट तानसेन की जन्मस्थली बेहट में झिलमिल नदी के किनारे हुई। संगीत सभा का शुभारंभ बुधवार सुबह 10 बजे हुआ। सबसे पहली प्रस्तुति तानसेन संगीत कला केंद्र के छात्रों के ध्रुपद गायन से हुई। इसके बाद शारदा नाथ मंदिर के कलाकारों का ध्रुपद गायन हुआ। इसके अलावा जगत नारायण शर्मा का पखावज वादन, हेमांग कोल्हटकर का गायन और सोमबाला सातले कुमार का ध्रुपद गायन हुआ। संगीत की स्वरलहरियों ने कला रसिकों का मन मोह लिया। सभा में प्रदेश के उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री भारत सिंह कुशवाह मौजूद थे।
जयपुर से आईं ध्रुपद गायिका डॉ. मधु भट्ट तैलंग की प्रस्तुति ने रसिकों पर गहरी छाप छोड़ी। उन्होंने राग कोमल ऋषभ आशावरी में आलापचारी करते हुए धमार ताल में बंदिश लाजन भीज गई... का गायन अपनी खनकदार आवाज में किया। इसके बाद शुद्ध धैवत के राग गुणकली में तानसेन रचित बंदिश जय शारदे भवानी का गायन कर सुर सम्राट को स्वरांजलि अर्पित की। इसी के साथ उन्होंने अपने गायन को विराम दिया। उनके गायन में पखावज पर अंकित पारिख और सारंगी पर आबिद हुसैन की संगत को भी रसिकों ने खूब सराहा।
यश ने बिखेरे गायकी के सुर
दानेदार, बुलंद और सुरीली आवाज में जब युवा पीढ़ी के उदयीमान शास्त्रीय गायक यश देवले ने राग शुद्ध सारंग और तीन ताल में निबद्ध छोटा ख्याल अब मोरी बात मानी रे... का सुमधुर गायन किया तो प्रांगण घरानेदार गायकी से गुंजायमान हो उठा। ग्वालियर के सुविख्यात संगीत गुरू संजय देवले के सुपुत्र यश देवले ग्वालियर एवं आगरा घराने की गायकी में सिद्धहस्त हैं। उन्होंने अपने गायन की शुरुआत इसी राग और विलंबित एक ताल में बड़ा ख्याल ऐ बनाबन आयो री... के गायन से की। उनके गायन में सुंदर आलापचारी के साथ ठहराव ने रसिकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यश देवले ने आगरा घराने के श्री जितेन्द्र अभिषेकी द्वारा रचित मराठी रचना घेई छंद मकरंद को झपताल में पिरोकर पेश किया तो रसिक वाह वाह करने को मजबूर हो गए।