तानसेन समारोह में मंगलवार को प्रात:कालीन सभा में मधुभट्ट के ध्रुपद गायन से शीतल बयार में आई गरमाहट...

Dec 29 2020

ग्वालियर। जयपुर से आईं  ध्रुपद गायिका डॉ. मधु भट्ट तैलंग की प्रस्तुति ने रसिकों पर गहरी छाप छोड़ी। तानसेन समारोह में मंगलवार को  प्रात:कालीन सभा में चल रही शीतल बयार के बीच डॉ. मधु भट्ट का गायन हुआ तो वातावरण में गरमाहट दौड़ गई।
 उन्होंने राग "कोमल ऋषभ आशावरी" में आलापचारी करते हुए धमार ताल में बंदिश "लाजन भीज गई" का खनकदार आवाज में गायन किया। इसके बाद शुद्ध धैवत के राग "गुनकली" में तानसेन रचित बंदिश "जय शारदे भवानी" का गायन कर सुर सम्राट को स्वरांजलि अर्पित की। इसी के साथ उन्होंने अपने गायन को विराम दिया।उनके गायन में तिहाइयां एवं चक्करदार का उपयोग संगीतप्रेमियों के लिए सुनने योग्य था। उनके साथ पखावज पर श्री अंकित पारिख और सारंगी पर आबिद हुसैन की संगत को भी रसिकों ने खूब सराहा।
मैंडोलिन से मिले हिंदुस्तानी सुर तो धूप-छाँव का हुआ अहसास...
पश्चिमी वाद्य यंत्र मैंडोलिन पर जब कोलकाता से आए अग्रणी पंक्ति के कलाकार सुगातो भादुड़ी की अंगुलियाँ थिरकीं तो रसिकों को कभी धुंध व कोहरा तो कभी तेज धूप का एहसास हुआ। उन्होंने  राग "अहीर विभास" में मनोहारी वादन किया।
इस राग का सृजन राग अहीर व विभास के मेल से हुआ है। राग "अहीर" जहाँ धुंध व कोहरे का आभास कराता है वहीं मारवा ठाठ का राग "विभास" धूप की अनुभूति देता है। जब इस राग का गायन सुबह व दोपहर के मिलन की बेला में होता है तो सुरों का अलग ही जादू पैदा होता है।
श्री सुगातो भादुड़ी ने विधिवत आलापचारी के बाद मध्य लय तीन ताल में सितारखानी पेश की। उन्होंने तंत्रकारी के साथ गायकी अंग का भी बेहतरीन प्रदर्शन किया। बीन, रवाब, सरोद, सितार आदि वाद्य यंत्रों की रागदारी का समावेश उनके वादन में दिखाई दिया। मैंडोलिन वादन सुनकर गुणीय रसिक मंत्रमुग्ध हो गए। तबले पर उदयीमान तबला वादक की संगत शानदार रही।