गूजरी तोड़ी का राग छेड़ा तो वायोलिन वादन से घुल गई मिसुरी

Dec 28 2020

ग्वालियर। मिसुरी से भी मीठे राग गूजरी तोड़ी में जब हिदुस्तानी शास्त्रीय संगीत जगत के सुप्रसिद्ध वायोलिन वादक कमल कामले ने वायोलिन वादन किया तो मीठे-मीठे सुरों से भरीं सुरीली लहरें हिलोरें लेने लगीं। रसिकों को लगा उनके कानों में मिसुरी घुल गई है।
तानसेन समारोह में सोमवार की प्रात:कालीन सभा में पहले कलाकार के रूप में उनकी प्रस्तुति हुई। राग गूजरी तोड़ी दिन के रागों में बडा ही मीठा परंतु कठिन राग है। इस राग का सृजन राजा मानसिंह की प्रेयसी एवं धर्मपत्नी मृगनयनी ने किया था। सुर सम्राट तानसेन द्वारा रचित राग मियाँ की तोड़ी में से यदि पंचम हटा दिया जाय तो वह राग गूजरी तोड़ी का रूप ले लेता है। इस राग में गायन-वादन के लिये बहुत रियाज की आवश्यकता होती है।
श्री कामले ने वायोलिन वादन में राग गूजरी तोड़ी में विलंबित गत एक ताल और द्रुत तीन ताल में प्रस्तुत कर रसिकों का मन जीत लिया। उन्होंने जब प्रसिद्ध ठुमरी याद पिया की आये की धुन निकाली तो संपूर्ण प्रांगण विरहमय हो गया। कामले जी ने अपने वादन का समापन राग परमेश्वरी में एक धुन निकालकर किया। उनके साथ वियात तबला वादक सलीम अल्लाह वाले ने नफासत भरी संगत की। इधर तानसेन समारोह में प्रात:कालीन सभा की शुरुआत स्थानीय तानसेन संगीत महाविद्यालय के धु्रपद गायन से हुई। राग देशी और ताल चौताल में बंदिश के बोल थे रघुवर की छवि सुंदर। पखवाज पर पंडित जगत नारायण ने संगत की।