तानसेन समारोह के दूसरे दिन कश्मीर के संतूर वादन ने ग्वालियर में कराया ठंडी वादियों का अहसास

Dec 27 2020

ग्वालियर। तानसेन समारोह के दूसरे दिन संतूर के तारों से मीठे मीठे सुर झरे तो माहौल में तपन पैदा हो गई। कश्मीर के सूफियाना घराने से ताल्लुक रखने वाले प्रयात संतूर वादक अभय रुस्तम सोपोरी की अँगुलियां संतूर के तारों से खूब खेलीं। फिर या रागों का विहाग आसमान पर छा गया। सूर्य देवता ने तपन पैदा की तो अभय रुस्तम ने अपने संतूर वादन से कश्मीर की हसीन वादियों की ठंडक का एहसास कराया। फिर या सुधीय रसिक ध्यानमग्न होकर राग- रागिनियों संग आनंद के सागर में गोते लगाते नजऱ आये। उन्होंने राग वसंत बुखारी में आलाप जोड़-झाला से अपने वादन की शुरुआत की।
इसके बाद 11 मात्रा में विलंबित गत पेश कर समा बांध दिया। संतूर से निकल रही आवाज किसी झरने के गिरने का एहसास पैदा कर रही थी। ये झरने लगता था, कश्मीर की वादियों के हैं। उनका अपना सौंदर्य है। छह पीढिय़ों का अनुभव अभय जी की उंगलियों से निकल रहा था। उनके साथ तबले पर उस्ताद अकरम खां, पखावज पर अंकित पारिख और दक्षिण भारतीय वाद्य घटम पर राजशेखर जी की संगत भी कमाल की रही। इससे पूर्व तानसेन समारोह की प्रात:कालीन सभा की शुरूआत पारंपरिक रूप से स्थानीय शंकर गांधर्व संगीत महाविद्यालय द्वारा प्रस्तुत धु्रपद गायन के साथ हुई। राग भैरव में ताल चौताल भवन निबद्ध बंदिश के बोल थे गणपति गणनायक...। 
 तानसेन के आँगन में जले विश्व संगीत के अलाव
दिसंबर माह की सर्द सांध्यबेला में जब सात समुंदर पार स्थित उत्तर अमेरकीय देश मैक्सिको से आए डेनियल रावि रैंजल ने स्पेनिश गिटार से शास्त्रीय संगीत एवं वेस्टर्न म्यूजिक की मीठी-मीठी मिश्रित धुन निकालीं तो एक बारगी ऐसा लगा मानो सुर सम्राट तानसेन के आँगन में विश्व संगीत के अलाव जल उठे हैं। डेनियल रावि ने मैक्सिको के पारंपरिक लोकगीतों पर आधारित धुनें बजाकर रसिकों की खूब वाहवाही लूटी।इसी कड़ी में उन्होंने क्यूबन व ब्राजीलियन पारंपरिक सोंग सहित यूरोपियन ला, लिरोना, ला मजा, ओजला व साकुरा सोंग की धुनें भी स्पेनिश गिटार से निकाली। उनका कहना था कि भारतीय शास्त्रीय संगीत का आकर्षण उन्हें मैक्सिको से भारत खींच लाया। वर्तमान में वे भारत में(नई दिल्ली) सितारवादन की शिक्षा ले रहे हैं।