हर्ष-उल्लास के साथ मनाया प्रभु यीशु का जन्मोत्सव
Dec 25 2020
ग्वालियर। क्रिसमस के त्योहार को लेकर काफी उत्साह है हर वर्ष 25 दिसंबर को क्रिसमस का त्यौहार मनाया जाता है। विशेष रूप से यह त्यौहार ईसाई धर्म के लोग मनाते हैं। इसके अलावा, इस दिन बच्चों के प्यारे सांता क्लॉज उनको रात में तोहफे देते है। पहली बार क्रिसमस का पर्व रोम में 336 ईसा में मनाया गया था। तभी से हर साल 25 दिसंबर को ईसा मसीह का जन्म दिवस मनाया जाता है हालांकि, आजकल यह त्यौहार लगभग हर कोई मनाने लगा है। हर धर्म के लोग इस त्यौहार को मनाते हैं। इस त्यौहार का महत्व बहुत ज्यादा होता है। ईसाई धर्म में क्रिसमस के त्योहार की काफी धाॢमक मान्यता है।
क्रिसमस के त्योहार में सभी जाति धर्म के लोग एकजुट होकर इसका आनंद लेते है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, क्रिसमस के दिन ही येरुशलम के एक अस्तबल में मैरी ने प्रभु यीशु को जन्म दिया था. यीशु ही आगे चलकर ईसा मसीह कहलाए। ईसाई धर्म के लोग, यीशु के जन्मदिन की खुशी का जश्न मनाने के लिए ही क्रिसमस का त्योहार मनाते हैं। प्रभु यीशु का जन्मोत्सव ईसाई समाज ने हर्ष-उल्लास के साथ मनाया। समाज के लोग क्रिसमस की खुशियों में सराबोर नजर आए। इसाई समाज के सभी गिरजाघर संतरंगी रोशनी से सराबोर नजर आए। कोरोना के कारण इस बार गुरुवार शाम छह बजे से रात 9:45 बजे तक चर्चों में केरॉल सिंगिंग, प्रभु यीशु का स्वागत, प्रार्थनाएं सहित अन्य कार्यक्रम हुए। हर साल की तरह रात 12 बजे तक प्रभु यीशु के जन्मोत्सव के कार्यक्रम नहीं हुए। गिरजाघरों में कोरोना मुक्ति के लिए प्रभु यीशु से प्रार्थना की गई। सांता लॉज ने बोट लब, शहर की अलग-अलग जगहों पर बच्चों को टाफियों की जगह मास्क बांटे। बच्चों के हाथों को सैनिटाइज कराया गया।
प्रभु यीशु के आगमन के बाद उन्हें गिरजाघरों में सजाई गोशालाओं में ले जाया गया। श्रद्धालुओं ने प्रभु के पैर चूमकर उनका धरती पर आने पर स्वागत किया। गिरजाघरों में केक काटकर इसाई समाज के लोगों ने एक- दूसरे से बिना गले मिले सुरक्षित शारीरिक दूरी बनाकर हैप्पी क्रिसमस कहा। फालका बाजार स्थित चर्च में शुक्रवार को गिरजाघरों में सुबह 8:30 बजे से प्रार्थना सभाएं शुरू हो गई हैं। दोपहर 12 बजे तक मिस्सा चढ़ाने सहित अन्य आयोजन होंगे। दोपहर तीन बजे से गिरजाघर लोगों को देखने के लिए खोले। मुरार चर्च में ईसाई समाज के लोगों ने विधि-विधान से प्रभु यीशु का जन्मोत्सव मनाया। यहां से कैथोलिक समाज के सभी चर्च को शाम सात बजे प्रार्थना करने का संदेश दिया गया।
कैथोलिक समाज के सभी चर्चों में एक साथ प्रार्थना हुई। डेढ़ घंटे रात 8:30 बजे प्रार्थना हुई। इसके बाद एक-दूसरे को क्रिसमस की बधाई देने का सिलसिला रात साढ़े नौ बजे तक चलता रहा। कैथोलिक इसाई समाज के लोग उपस्थित रहे।
सिकन्दर कंपू में चर्च की विद्युत साज सज्जा को आने-जाने वाले लोगों ने देखा। शाम 6:30 से साढ़े नौ बजे तक प्रभु यीशु का आगमन की खुशियां मनाई गईं। बैंचों पर छह-छह की जगह तीन-तीन लोगों ने प्रार्थना की। देश व दुनिया की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थाना की। चर्च को बाहर व भीतर से डेकोरेट किया गया। शाम छह से नौ बजे तक कोरोना गाइडलाइन को देखते हुए कार्यक्रम हुए। केरॉल सिंगिंग, केक कटिंग से लेकर प्रभु यीशु से देश व दुनिया से कोरोना माहामारी की मुक्ति की प्रार्थना की गई। सभी वर्ग के लोग चर्च में उपस्थित रहे। चर्च में प्रभु यीशु के आगमन के लिए शाम छह बजे से इसाई समाज के लोगों का चर्च में आना शुरू हो गया।
यहां बनाई गई गोशाला व झांकी को देखने के बार केरॉल सिंगिंग हुआ। इसके बाद कैंडल जलाकर प्रार्थना हुई। चर्च के प्रमुख की अगुवाई में प्रभु यीशु से करोना से मुक्ति की प्रार्थना की गई। सतरंगी विद्युत साज-सÓजा को देखने बड़ी संया में लोग उपस्थित रहे। इसाई समाज के अलावा अन्य लोगों ने भी चर्च के सामने खड़े होकर सेल्फी ली।
चर्च के सामने कैंडल भी जलाए गए। यहां बनाई गई गौशाला लोगों का आकर्षक का केंद्र बनी। प्रार्थना सभा हुई। इसके बाद केक वितरण का कार्यक्रम हुआ। कोरोना से बचाव के लिए सुरक्षित शारीरिक दूरी बनाकर लोगों ने एक-दूसरे को क्रिसमस पर्व की बधाई दी। शाम सात बजे से केरॉल सिंगिंग शुरू हुई।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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