संतान को बचपन से ही प्रभु भक्ति संत सेवा के दें संस्कार-गुरुदेव

Dec 19 2020

ग्वालियर। संतान को बचपन से ही प्रभु भक्ति और संत सेवा के संस्कार देना चाहिए यह बात रानीघाटी स्थित गौशाला ग्वालियर में एकादश कुंडीय रुद्र महायज्ञ के अंतर्गत चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा का वाचन करते हुए श्रीकृष्णायन देशी गौरक्षा शाला के गुरुदेव  ने कही।
गुरुदेव महाराज ने भक्तों से कहां कि परिवार में एक पुत्र भी सत्कर्म प्रभु भक्ति और संत सेवा करता है तो पूरे परिवार का कल्याण हो जाता है और यदि परिवार सदस्य भी गलत मार्ग पकड़ ले तो पूरे परिवार का पतन निश्चित है महाराज जी ने कहां की बचपन से ही सत्कर्म मैं लगाना चाहिए। वेदों का शास्त्रों का ध्यान देना चाहिए शिवा शक्ति मार्ग पर चल एवं परिवार  और समाज  का कल्याण करें। महाराज ने कहां की एक समय बालक को कुष्ठरोग हो जाने के कारण उसकी मां ने उसे संतों की सेवा में लगा दिया और 6 महीने बाद वह बालक पूर्णरूप से ठीक होकर अपने घर परिवार में लौटा और वही बालक आगे चलकर अपने परिवार भरण पोषण कर परिवार का गौरव बना। महाराज जी कहते हैं कि गौ सेवा कलयुग में भगवान की सेवा है, सभी को अपने समर्थन अनुसार गौ सेवा में योगदान देना चाहिए।
रानी घाटी गौशाला में चल रहे एकादश कुंडीय रुद्र महायज्ञ के अंतर्गत श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा में स्वामी प्रेमानंद ने भगवान के 24 अवतारों का वर्णन किया और कहा कि ऐसा नहीं है कि भगवान भक्त प्रहलाद के पास ही नरसिंह रूप में प्रकट हुए,द्रोपदी के पास ही वस्त्र बनकर करके उनकी लाज बचाई, सुदामा की गरीबी को दूर किया बल्कि आज भी यदि हम द्रौपदी, प्रहलाद और सुदामा की तरह अपने धर्म का पालन करते हैं तो भगवान आज भी हमारे पास वैसे ही खड़े हैं जैसे उस समय उन भक्तों के पास खड़े थे। भक्त प्रहलाद को हिरण्य कश्यप ने सताया तो भी नरसिंह भगवान से प्रहलाद ने वरदान मांगा कि आप मेरे पिता को अपना बैकुंठधाम प्रदान कर दें उन्हें मुझे सताने कारण नरक की यातनाएं न झेलनी पड़े। आज पुत्र पिता से, माता से ऊंची आवाज में बात करता है यह शास्त्र में महा अपराध बताया गया है। मां पिता के पास विनम्रता पूर्वक बात रखनी चाहिए ऊंची आवाज में कभी नहीं बोलना चाहिए। श्री प्रेमानंद जी ने यह भी बताया कि माता द्रोपदी ने भगवान श्री कृष्ण की उंगली छिल जाने पर उनके हाथ पर साड़ी का टुकड़ा बांध दिया था उस साड़ी के टुकड़े को अनंत गुना बनाकर भगवान ने उनकी लाज बचाई।हमें भी भगवान के पास धरोहर के रूप में अपना जप,तप,यज्ञ सेवा रखनी चाहिए।जिस धरोहर से भगवान हमारी रक्षा करें।सत्संग करते हुए स्वामी पुष्करानंद जी ने कहा कि सनातन धर्म में ही अवतार की बात कही गई है। अन्य धर्मों में व्यक्ति विशेष ही ईश्वर से संबंध स्थापित कर सकता है अब उसके समान कोई और नहीं हो सकता ऐसा कहकर ईश्वर की कृपा को व्यक्ति विशेष तक सीमित रखा गया है।किंतु सनातन धर्म में स्त्री शूद्र आदि सभी को समान रूप से ईश्वर प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है,यह सनातन धर्म का गौरव है। वह शूद्र भी कुलीन है जो भगवान की भक्ति दरिया, दादू, रैदास की तरह करता है।वह जगत पूज्य हो जाता है। मानव शरीर हृदय में परमात्मा तत्व का अनुभव करने के लिए प्राप्त हुआ है अत: इसे व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए।
भागवत के दौरान तानसेन म्यूजिकल ग्रुप के नवीन सक्सेना एवं भास्कर पिंगले ने भजन गाकर श्रोताओं का मन मोह लिया। इस अवसर पर आरडी सिंघल, योगेंद्र अरोरा, राकेश अग्रवाल, प्रफुल्ल वेशमपायन मुख्य रूप से उपस्थित थे।