कोरोना मिटाने के लिए रानीघाटी में चल रहा है रुद्रमहायज्ञ

Dec 18 2020

ग्वालियर।कोरोना निवारण के लिए रानीघाटी गौशाला में एकादश कुंडीय रुद्र महायज्ञ आयोजित किया जा रहा है। महायज्ञ के साथ-साथ श्रीमद् भागवत कथा भी आयोजित की जा रही है। कथा वाचक स्वामी प्रेमानंद महाराज ने भागवत महात्म्य के अंतर्गत गोकर्ण उपाख्यान की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि संसार के लोगों को तन की सुंदरता अधिक प्रिय है। लेकिन भगवान को मन की सुंदरता अधिक प्रिय है। जितना प्रयत्न हम अपने शरीर को सुंदर बनाने के लिए करते हैं। उसका आधा ध्यान भी हम अपने मन को सुंदर बनाने पर देने लगे तो हमारा जीवन परमात्मा के योग्य बन सकता है।
उन्होंने कहा कि हम कपड़े तो हम नित्य धोते हैं किंतु अपने मन को भक्ति भाव ज्ञान से धोने का प्रयत्न नहीं करते। हम जीवन में पाप कर्म करते हैं। लेकिन उसका फल दुख नहीं भोगना चाहते। पुण्य कर्म नहीं करते लेकिन उसका फल सुख भोगना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि गौ माता की सेवा सबसे बड़ा धर्म है। गौ माता की सेवा से ही 33 करोड़ देवी देवताओं की एक साथ पूजा हो जाती है। गौमाता 33 करोड़ देवताओं का चलता-फिरता मंदिर है, जिनकी सेवा से सारे देवता पितर ऋषि महर्षि अति प्रसन्न होकर सेवक को अभीष्ट वरदान प्रदान कर देते हैं। ऐसी गौ माता की उपेक्षा करके कोई लाख भागवत सुने,भक्ति करे, वह फलदाई नहीं होता। इस अवसर पर सत्संग करते हुए स्वामी पुष्करानंद महाराज ने सनातन धर्म की महत्ता बताते हुए कहा कि सनातन धर्म अति प्राचीन धर्म है।
सनातन धर्म ही ऐसा है जिसमें सभी को समान रूप से मुक्ति का अधिकार है। ईश्वर प्राप्ति का अधिकार है। अन्य किसी धर्म में ऐसा देखने को नहीं मिलता। धूमेश्वर धाम से पधारे धूमेश्वर पीठाधीश्वर ने लोगों को गौ सेवा के लिए आगे आने को कहा। कलयुग में जो संतों और गायों की सेवा नहीं करते वे अत्यंत ही भाग्यहीन हैं। लोग ताश खेलकर अपना समय नष्ट करते हैं। ऐसे लोगों को रामायण और गीता का पाठ करके समय का सदुपयोग करना चाहिए। अभी भी आप चेत जाएं और धर्म रक्षार्थ तत्पर हो जाएं तो आगे आने वाली पीढ़ी का सुधार और कल्याण हो सकता है।