भागवत कथा को खरीदना और बेचना निंदनीय-गुरुदेव

Dec 17 2020

ग्वालियर। श्रीमदभागवत कथा को खरीदने और बेचने का कारोबार चल रहा है जो शास्त्र संगत नहीं है, ऐसे लोगों ने श्रीमदभागवत कथा के आयोजनों को मनोरंजन के पंडालों में सजाया जा रहा है, इस विकृति से समाज को बचना चाहिए, जो लोग कथा को बेचते हैं और जो लोग कथा कराने के नाम पर कथा को खरीदने का काम करते हैं, ऐसे लोग पाप कमाते हैं और समाज को दूषित करते हैं, कथा बेचने और खरीदने के लिए नहीं होती, यह तो समाज को सही दिशा दिखाती है, धर्म की स्थापना करती है, यह बात श्रीकृष्णायन देशी गौरक्षा शाला के गुरुदेव ने रानीघाटी स्थित गौशाला पर आयोजित हो रहे रुद्रमहायज्ञ के दौरान चल रही श्रीमदभागवत कथा के दौरान कथा श्रवण कर रहे ग्रामीणों से कही।
वहीं यज्ञ के चौथे दिन श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा के अंतर्गत ज्ञान भक्ति और वैराग्य का उपाख्यान सुनाते हुए स्वामी प्रेमानंद ने कहा परोक्ष ज्ञान और अपरोक्ष ज्ञान दो प्रकार का ज्ञान होता है। परमात्मा को एक मंदिर,मूर्ति आदि तक सीमित समझना परोक्ष ज्ञान है और सर्व व्यापक समझना अपरोक्ष ज्ञान है। सबमें परमात्मा का वंदन करने से विरोध समाप्त हो जाता है। बंदन हमारे बंधन को खोलता है। समय को जो स्वर्ण से भी अधिक मूल्यवान समझता हो वही साधु है। संतो की महिमा बताते हुए स्वामी प्रेमानंद ने कहा जैसे नदी अपना जल स्वयं नहीं पीती, वृक्ष अपना फल स्वयं नहीं खाते। वैसे ही संत जगत कल्याण के लिये जीवन जीते हैं अपने सुख के लिए नहीं। जो दूसरों के सुख से सुखी और दूसरों के दुख से दुखी होता है वही संत है। इस अवसर पर सत्संग करते हुए स्वामी  पुष्करानंद ने मातृशक्ति के सम्मान की बात की और अपशब्द का प्रयोग समाज का सब से गिरा हुआ स्तर बताया ऐसा न करने की प्रेरणा दी। वहीं यज्ञ की परिक्रमा करने के लिए शहर व दूर दराज के गांव से आने वाले ग्रामीणों का क्रम जारी रहा।