संसार में कर्मफल से कोई नहीं बच सकता, जैसे कर्म करोगे वैसा फल मिलेगा: मुनिश्री

Dec 15 2020

ग्वालियर। संतों का काम मनुष्य को धर्म का मार्ग दिखाना है। जीवन में धन तो हर कोई कमा सकता है, लेकिन भक्ति करने का सौभाग्य हर किसी के नसीब में नहीं होता है। प्रभु भक्ति का धन जो कमा लेता है उसका कल्याण होता है। यह विचार मुनिश्री विश्वनायक सागर महाराज ने मंगलवार को भिंड की ओर मंगल  विहार करते हुए लक्ष्मणगढ़ में धर्मचर्चा में व्यक्त किए। मुनिश्री विनिबोध सागर महाराज भी मौजूद थे।
मुनिश्री ने कहा कि संसार में कर्म फल से कोई नहीं बच सकता है। जैसे कर्म करोगे वैसे फल मिलेंगे। पीडि़त जीव की सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। सेवा और पूजा समझकर किए गए कार्य खुद के लिए तो प्रसन्नाता दायक होते ही हैं, इससे भगवान भी खुश होते हैं। कर्म ऐसे करें कि हमें पछताना न पड़े। मुनिश्री ने कहा कि जिसका स्वभाव सरल हो, मन निर्मल हो और जो मिल जाए उसी में संतोष हो ऐसे व्यक्ति दुनिया में विरले ही होते हैं।
मुनिश्री ने ग्वालियर से भिंड की ओर मंगल विहार किया
 जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि मंगलवार को डॉ योगेश जैन रचना नगर के निवास पर सुबह आचार्यश्री विराग सागर महाराज के परम शिष्य मुनिश्री विश्वनायक सागर महाराज, मुनिश्री विनिबोध सागर महाराज की आहारचर्या हुई। जिसके बाद दोपहर में मुनिश्री के चरणो में दिगंबर जैन युवा जागरण मंच ग्रेटर ग्वालियर के अध्यक्ष महेंद्र जैन, नीरज जैन, डॉ योगेश जैन, राहुल जैन, विपुल जैन, प्रवक्ता सचिन जैन,  कमल जैन, रूपेश जैन, ने श्रीफल चढ़कर आशीर्वाद लिया। मुनिश्री का पिंटू पार्क से पद विहार कर लक्ष्मणगढ़ पहुचे जहाँ रात्रि विश्राम कर बुधवार की सुबह मालनपुर में मुनिश्री की आहराचार्य के बाद भिंड की ओर विहार करेंगे।