छह साल में पहली बार ठिठुरन फ्री दिसंबर

Dec 10 2020

ग्वालियर। कड़क सर्दी के लिए जाने जाने वाले दिसंबर के बीते छह साल के आंकड़ों पर निगाह डाली जाए तो फिर ऐसा पहली बार हो रहा है, जबकि दिसंबर ठिठुरन फ्री है, लोग शीतलहर, कोहरे, मावठ और ओस से बचे हुए हैं। पारा पहली दिसंबर से रुतबा कायम किए हुए हैं और आज फिर 11 डिग्री सेल्सियस के पार होकर सामान्य से साढ़े तीन डिग्री अधिक है, जबकि 2015 से अब तक के आज के आंकड़े पर नजर डाली जाए तो ऐसा नहीं हुआ, बल्कि इन दिनों में लोगों को तेज सर्दी के कारण घर से बाहर निकलना तक मुश्किल हो जाता था। यही नहीं तेज शीतलहर घर में घुसकर वार किया करती थी, बल्कि बीते सालों को याद करते ही शरीर में सिहरन सी दौड़ जाती है, लेकिन इस बार हालात टोटल बदले हुए हैं, सुबह से तेज धूप खिलती है और दोपहर से पहले ही इसका रवैया इतना कड़क हो जाता है कि इसे झेलना तक भारी पड़ता है, बल्कि सर्दी के मौसम में भी गर्मी का अहसास होने लगता है।
बुधवार को भी धूप का कड़ा रुख 
भले ही मौसम विभाग पांच दिसंबर से हर रोज अगले कुछ घंटों में तेज सर्दी की चेतावनी देता रहा हो, लेकिन असर उल्टा ही पड़ा। आज भी सर्दी सूरज के तेज के सामने निस्तेज ही नजर आई। आठ बजे सूरज की किरणों ने जमीन को स्पर्श किया तो फिर मुड़कर नहीं देखा, बल्कि भारी पड़ती रहीं, 11 बजे लोगों को गर्म कपड़े उतारने पड़े। जो लोग सुबह जल्दी दफ्तर या फिर अन्य काम से घर से निकलते थे उन्हें भी अपने स्वेटर उतारकर या खूंटी पर टांगने पड़े या फिर उतारकर परे रखना पड़ा। अब फिलहाल मौसम के जानकार किसी भी बदलाव से इंकार कर रहे हैं।
क्यों नहीं पड़ रही सर्दी
जब लोग सर्दी से कांपते हैं तो इसे कोसते हैं और अधिक गर्मी होने पर भी कमोवेश उनके विचार यही होते हैं, अब जबकि दिसंबर में भी सर्दी मुंह छिपा रही है, ऐसे में लोगों को यह भी नहीं सुहा रहा, बल्कि वह अब यह कह रहे हैं कि सर्दी क्यों नहीं पड़ रही। उधर मौसम के जानकारों का इसे लेकर कहना यह है कि राजस्थान और हरियाणा के ऊपर फिर चक्रवात बन गया है, वहीं बंगाल की खाड़ी से नमी लगातार प्रवेश कर रही है।
इन्हें सताने लगा डर
जैसे-जैसे दिसंबर बीत रहा है उन दुकानदारों के चेहरों की रौनक फीकी पडऩी शुरु हो गई है जो कि गर्म कपड़े का कारोबार करते हैं, पिछली साल अच्छी ठंड के चलते इनका धंधा खूब चमका था, ऐसे में इस बार यह दोगुनी तैयारी कर बैठे थे। लेकिन फिलहाल ठंड के जो हालात है वह इन्हे अब डरा रहे हैं। वैसे भी ग्वालियर में दिसंबर और जनवरी ही ठंड के मुख्य माह हैं। अब दिसंबर का पहला पखवाड़ा तो लगभग निराश कर रहा है, लोग दुकानें सजाए बैठे हैं, लेकिन ग्राहकों का टोटा है। यही हाल हीटर आदि बेचने वालों का भी है।