सुबह से मजदूर पहुंचे सफाई और पुताई करने , तानसेन समारोह : संवर रहा मकबरा

Dec 08 2020

ग्वालियर। भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में देश का सर्वाधिक प्रतिष्ठित महोत्सव तानसेन समारोह संगीत की नगरी ग्वालियर में इस साल 26 से 30 दिसम्बर तक आयोजित किया जाएगा। इसको लेकर तानसेन की समाधि पर तैयारियां शुरु हो गई हैं। मंगलवार सुबह तानसेन की समाधि पर पहुंचकर मजदूरों ने साफ-सफाई का काम शुरू कर दिया। इसके अलावा दोपहर से यहां के पार्क में लगी ग्रिल पर रंग-रोगन का काम शुरु हो गया। यह समारोह मध्य प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित किया जाता है। तानसेन समारोह में विदेशी श्रोता भी आते हैं। 19 जनवरी 1928 में जब पं.कृष्णराव पंडित का गायन हो रहा था तब यहां इतनी भीड़ हो गई थी कि व्यवस्थाएं करना मुश्किल हो गया था।
तानसेन की समाधि वो जगह है जहां अकबर के दरबार के नवरत्नों में से तानसेन 400 साल से यहां दफन हैं। अकबरनामा के मुताबिक सन 1562 से 1586 तक तानसेन उनके दरबार में संगीतकार थे। मरते समय उनकी आखिरी इच्छा थी कि उनकी समाधि वहीं बनाई जाए जहां उनके गुरु दफन हैं। मोहम्मद गौस और तानसेन का मकबरा देखने के लिए कोई शुल्क नहीं लगता ना ही कोई पार्किंग फीस। 
कौन थे तानसेन और मोहम्मद गौस
अकबर से पहले तानसेन मान सिंह तोमर के दरबार में संगीतकार थे। मान सिंह की मौत के बाद वे रीवा के राजा रामचन्द्र के दरबार में संगीतकार रहे। इसी दौरान उन्हें अकबर द्वारादिल्ली आने का निमंत्रण मिला। इस बात का कोई तथ्य नहीं है की तानसेन की असल जन्म तिथि क्या है। इतिहासकार प्रमिला चोपड़ा ने बताया कि उनका जन्म 1493 में ग्वालियर के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनका नाम रखा गया था रामतनु पाण्डे। तानसेन की मृत्यु 1586 में आगरा में हुई थी। कुछ इतिहासकारों के अनुसार उनको मुस्लिम रिवाजो से दफनाया गया कुछ कहते है हिन्दू रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार हुआ।