गेड़ेवाली सड़क स्थित दिगम्बर जैन नसिया मंदिर मे जैन मुनिसंतो की धर्मसभा हुई

Dec 06 2020

ग्वालियर। संसार के प्रत्येक आत्मा मे ज्ञान गुण भरा हुआ है। कोई भी जीव ऐसा नहीं जिसमें ज्ञान न हो, और इस ज्ञान की सही दिशा मे हमें सच्चें निग्र्रन्थ गुरूओ से मिलता है। हार सम्प्रदाय मे गुरू को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। कहते है-सारी पृथ्वी को कागज बनालूॅ, सारे वन की लकडियों को कलम बनाकर भी गुरू गुण लिखना अवश्यक है। गुरू गुणो के भण्डार हुआ करते है। जब गुरू की इतनी महिमा है तो प्रभु कितनी होगी। यह विचार राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज ने रविवार को गेड़ेवाली संडक स्थित श्री दिगम्बर जैन नसिया मदिंर मे धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
मुनिश्री विश्वनायक सागर महाराज ने कहा कि माता पिता अपने परिवार के गृहस्थ जीवन में बच्चों को वो संस्कार दे जो कम समय मे योगी बन न सके तो भोगी नही उपयोगी जरूर बन जाएं। माता पिता अपने बच्चों को  धर्मगुरु ओर धर्म संस्कार से जुडऩे की आज बहुत आवश्यकता है। बच्चे आज गलत राह पर चल रहे है। मुनिश्री विजयेश सागर महाराज ने भी संबोधित किया। प्रवचन से पहले भगवन पार्श्वनाथ का अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। मुनिराजों के चरणों मे चंपाबाग मंदिर के अध्यक्ष वीरेंद्र गंगवाल, विनय कासलीवाल, संजीव अजमेरा, पंकज बाकलीवाल, वरैया जैन मंदिर के अध्यक्ष हीरालाल वरैया, मुकेश जैन, पीसी जैन, भरत वैराग्गी, धर्म वरैया, महेंद्र जैन, रवि जैन, नीरज जैन, मनोज टाईगर, राहुल जैन प्रवक्ता सचिन जैन ने श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया!
ग्वालियर गौरव मुनिश्री का नगर प्रवेश हुआ, समाजजनो ने आरती उतारी
आचार्यश्री विराग सागर महाराज के परम शिष्य ग्वालियर जैन समाज के गौरव मुनिश्री विश्वनायक सागर महाराज एवं मुनिश्री विनिबोध सागर महाराज का दिगंबर जैन जागरण युवा संघ एवं दिगंबर वरैया जैन समाज ने पादप्रक्षालन कर आरती उतारकर इंदरगंज जैन मंदिर से गाजेबाजे के साथ भव्य नगर प्रवेश कराया। नगर प्रवेश इंदरगंज, पाटकर चौराहे, गस्त का ताजिया से होते हुए नई सडक पहुचने पर जैन संतो का मिलन हुआ।
जैन संतो का वात्सल्य मिलन हुआ, मुनिश्री के गूंजे जयकारे
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि रविवार को नई सडक पर मुनिश्री विश्वनायक सागर एवं मुनिश्री विनिबोध सागर महाराज भव्य वात्सल्य मिलन राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्ष सागर महाराज एवं मुनि विजयेश सागर महाराज से हुआ। मुनिश्री विश्वनायक सागर एवं मुनिश्री विनिबोध सागर महाराज ने साष्टांग दण्डवत प्रणाम राष्ट्रसंत मुनिश्री विहर्ष सागर को किया तो उंहोने उठाया और गले से लगा लिया। वही मौजूद जैन समाज के लोगो ने भव्य मिलन देकर गुरूदेव के जयकारो से गूंज उठे।