सूरज बने दिव्यांग युवाओं के प्रेरणास्रोत

Dec 03 2020

ग्वालियर। दिव्यांगता शारीरिक नहीं व्यक्ति के दिमाग की होती है। शारीरिक रुप से कोई कमी व्यक्ति को दिव्यांग नहीं बनाती बल्कि यदि व्यक्ति में कुछ कर दिखाने का जुनून है तो कोई कमी आडे नहीं आती। इसके एक नहीं सैकडों उदाहरण हैं। ऐसा ही कुछ साबित किया है, शहर के प्रतिभावान दिव्यांग क्रिकेट खिलाडी सूरज मनकेले। जो शारीरिक रुप से तो दिव्यांग हैं लेकिन मानसिक एवं जुनूनी रुप में कोई उनका सानी नहीं है। सूरज ने दिव्यांग क्रिकेट में एक दो नहीं बल्कि दर्जनों पुरुस्कार जीतकर शहर का नाम देश विदेश में रोशन किया है।
सूरज मनकेले भारतीय दिव्यांग क्रिकेट खिलाड़ी भारतीय दिव्यांग क्रिकेट टीम के महत्वपूर्ण सदस्य हैं तथा वह देशभर के विभिन्न शहरों के साथ ही दुनिया के भी अनेक देशों में अपने बल्ले एवं विकेटकीपिंग का जौहर दिखा चुके हैं। सूरज आज अनेक दिव्यांग खिलाडियों के प्रेरणास्रोत बन गए हैं। जो दिव्यांग यह सोचते हैं कि हम तो दिव्यांग हैं इसलिए कुछ नहीं कर सकते हैं, लेकिन सूरज ने यह साबित कर दिखाया कि यदि मन में कुछ करने का जुनून हो तो कोई दिव्यांगता आडे नहीं आती।
सूरज मनकेले ग्वालियर मध्य प्रदेश के निवासी हैं और 17 साल के क्रिकेट कैरियर में अब तक 40 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच तथा 100 से ज्यादा राष्ट्रीय क्रिकेट मैच खेल चुके हैं। वह 2003 से वर्तमान में क्रिकेट खेल रहे हैं। वह भारत में ही नहीं कई देशों में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं जिसमें थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल में भारतीय झंडे को फहरा चुके हैं। वह 2015 में एशिया कप विजेता भारतीय टीम के सदस्य रहे हैं। इसके साथ- साथ सूरज मनकेले शासकीय स्कूल भदरौली में पदस्थ हैं और शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने कई समान प्राप्त किए है तथा समय-समय पर सामाजिक कार्यों में भी भाग लेकर जरूरतमंदों की मदद करते हैं।