ग्वालियर सहित अंचल में कई जगह ओले और बारिश

Nov 16 2020

ग्वालियर चम्बल अंचल में दीवाली के दूसरे दिन यानी गोवर्धन पूजा के दिन मौसम ने एकदम करवट ले ली। सुबह से ही बादलों ने डेरा जमा लिया और सूरज को दर्शन देने का मौका ही नहीं दिया। ग्वालियर शहर में सुबह से ही सिटी सेंटर और मुरार इलाके में रिमझिम बारिश होती रही। लेकिन दोपहर में अचानक शहर के अनेक इलाको में लगभग आधा घटे तक तेज़ बरसात हुई।
यह सिलसिला कुछ घण्टे तक थमा रहा लेकिन शाम सात बजे से एक बार फिर तेज आवाज के साथ बादल गरजने लगे और बिजली की कौंध उठने लगी। इसके बाद बरसात शुरू हो गई जो देर रात तक जारी रही।
हजीरा इलाके में ओले पड़े 
ग्वालियर के हजीरा इलाके में बरसात के साथ काफी बड़े बड़े ओले भी गिरे। इन्हें इक_ा कर लोगों ने हाथों में भरकर फ़ोटो खींचे और सोशल मीडिया पर वायरल भी किये। संभाग के ताकऱीवां सभी जिलों में सुबह से ऐसा ही मौसम बना हुआ हूंआ है। मुरैना, भिंड और शिवपुरी जिले के कई इलाकों में भी बरसात के साथ ओलावृष्टि की खबर है।
कुल पांच घंटे में 54.6 मिमी पानी गिरा
दक्षिणी पाकिस्तान के ऊपर बने चक्रवाती घेरे और अरब सागर से आ रही नमी के चलते रविवार को अंचल का मौसम अचानक बदल गया। सुबह से छाए बादलों ने पहले दोपहर में और फिर देर शाम और रात में कुल पांच घंटे में 54.6 मिमी पानी गिरा। इससे नवंबर में बारिश का 41 साल का रिकॉर्ड टूट गया। मौसम विभाग के आंकड़ों में इससे पहले 28 नवंबर 1979 को 24 घंटे में 55.1 मिमी बारिश दर्ज है। अंचल के भिंड, मुरैना और श्योपुर में कई जगह तेज बारिश हुई। मुरैना में दस मिनट तक बेर के आकार के ओले भी गिरे। 
जिले के माता बसैया क्षेत्र में दोपहर में आकाशीय बिजली गिरने से सेवानिवृत फौजी जगदीश राठौर (60) की मौत हो गई। ग्वालियर में पहले दोपहर 2 बजे फिर रात पौने आठ बजे से बारिश का दौर शुरू हुआ। 8:45 बजे करीब कुछ देर के लिए बारिश रुकी और फिर शुरू हो गई। इस दौरान बिजली भी कड़कती रही। बारिश से अब तापमान में गिरावट के साथ कोहरा भी छाएगा। किसानों के लिहाज से चना, मटर और सरसों की फसल के साथ ही गेहूं की बोनी की तैयारी में पलेवा में लगे किसानों के लिए बारिश अमृत है।
उत्तर भारत में बर्फबारी का असर मप्र में दिखाई पड़ रहा है। यहां भोपाल समेत प्रदेश के 32 से ज्यादा जिलों में रात का तापमान सामान्य से 2 से 5.8 डिग्री तक ज्यादा। पिछले 13 दिनों से रात में पड़ रही तेज ठंड गायब है। इसकी वजह बताते हुए मौसम वैज्ञानिक एचएस पांडे कहते हैं उत्तर भारत में वेस्टर्न डिस्टरबेंस से जब बारिश या बर्फबारी होती है तो मप्र हवा का रुख दक्षिणी हो जाता है। ये हवा समुद्र से नमी लाती है तो तापमान बढ़ता है। जब देश के उत्तरी हिस्से से यह सिस्टम गुजर जाता है तो वहां बर्फ पिघलती है। तीन- चार दिन बाद वहां से हमारे यहां उत्तरी हवा बर्फीली हवा लाती है। इसके बाद ही हमारे यहां ठंड बढ़ती है।