भाईदौज पर केन्द्रीय जेल में पहुंची बहनों ने किए भाईयों को टीके

Nov 16 2020

ग्वालियर। ग्वालियर अंचल में भाई दौज का त्यौहार हर्षोल्लास से मनाया गया। भाई दौज पर बहनों ने अपने भाईयों को टीके किए और उनकी लंबी उम्र की कामना की। इस अवसर पर केन्द्रीय जेल में भी भाईयों को टीका करने बहनें पहुंची। जेल प्रशासन ने भाई दौज के लिए विशेष व्यवस्था की थी। 
दीपावली के त्यौहार का अंतिम चरण भाईदौज ग्वालियर अंचल में पूरे हर्षोल्लास से मनाया गया। दौज का त्यौहार भी परंपरागत तरीके से मनाया गया। दौज पर बहनों ने अपने भाईयों को टीका कर उनकी लंबी उम्र की कामना की। वहीं भाईयों ने भी बहनों के प्रति अपने प्रेम का इजहार किया। इधर केन्द्रीय जेल में बंद कैदी भाईयों से मिलने भारी संख्या में बहनें पहुंची, बहनों ने भाईयों को तिलक किया। कैदी भाई अपनी बहनों से मिलकर आंसू नहीं रोक पाये। खुशी से बहन-भाई दोनों के आंसू भी झलक आए। वहीं जेल प्रशासन ने दौज पर्व को मनाने की व्यापक व्यवस्था की थी। बहनें अपने साथ भाईयों के लिए मिठाई, ड्रायफ्रूट, सब्जी पूड़ी सहित अन्य पकवान व खाने पीने की वस्तुएं लेकर पहुंची थी, लेकिन जेल मुन्युअल के चलते सिर्फ मिठाई के दो तीन टुकडे ही लेकर बहनों ने अपने भाई का टीका किया। 
जेल में परंपरागत रूप से दीपावली की भाइदूज पर सोमवार को ओपन जेल में बंदियों से महिलाओं की मुलाकात कराने की व्यवस्था की गई। मुलाकात के लिए बहनों के लिए जेल के गेट सुबह साढ़े आठ बजे खोल दिए गए। मुलाकात दोपहर ढाई बजे तक कराई गई। महिलाओं की सबसे पहले फिजिकल जांच व सामान की जांच जेल के मेनगेट पर की गई। इसके अलावा जेल के अंदर भी 2 चेकिंग प्वॉइंट बनाए गए थे।
 हर्षोल्लास से मनाया गया भैया दूज का त्योहार
भाई बहन के प्यार का प्रतीक भैया दूज का पर्व सोमवार को उत्साह के साथ मनाया गया। इस दौरान भाइयों के माथे टीको से सजे दिखाई दिए। दिन भर बहनों का अपने भाइयों के यहां टीका लगाने के लिए पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। माथे पर टीका लगाते हुए बहनों ने अपने भाइयों की सलामती और दीर्घायु की दुआ मांगी। वहीं सुबह से ही दुकानों पर खरीदारी करने के लिए महिलाओं और युवतियों का तांता लगा रहा। मिठाइयों से लेकर आकर्षक तोहफों की खरीदारी की गई। बहन भाई के प्रेम को दर्शाता भैया दूज का त्योहार  नगर के साथ-साथ  ग्रामीण अंचल में धूमधाम से मनाया गया। मंदिरों में की पूजा: भाईबहन के अटूट प्रेम को सूत्र में पिरोते इस त्योहार को लेकर जितना उत्साह बहनों में दिखा, उतना ही भाई भी उत्साहित दिखे। भाइयों ने भी अपनी बहनों को स्नेह स्वरूप उपहार दिए। बाजार में महिलाओं और युवतियों ने जमकर खरीदारी की। मंदिरों में इस मौके पर सुबह से ही पूजा-अर्चना के लिए तांता लगा रहा। धनतेरस, छोटी दीपावली, लक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजा और भैया दूज के साथ ही पांच दिवसीय दीपावली का पर्व हर्षोल्लास के साथ संपन्न हो गया। भाई दूज पर्व के संबंध में पंडित कमल किशोर  शास्त्री ( हक्के गुरु) ने कहा कि भाई दूज का पर्व भाई-बहन के रिश्ते पर आधारित पर्व है। जिसे बड़ी श्रद्धा और परस्पर प्रेम के साथ मनाया जाता है। रक्षाबंधन के बाद, भाईदूज ऐसा दूसरा त्योहार है।, जो भाई बहन के अगाध प्रेम को समर्पित है। भाई दूज का पर्व दीपावली के तीसरे दिन मनाया जाता है। इस दिन भाई को तिलक लगाकर प्रेमपूर्वक भोजन कराने से परस्पर तो प्रेम बढ़ता ही है।भाई की उम्र भी लंबी होती है।
क्या है भाईदूज की मान्यता
भाईदूज के रूप में मनाए जाने वाले त्योहार के लिए ऐसा माना जाता है। कि दीपावली के बाद भाई दूज के दिन ही यमराज ने अपनी बहन यमी के घर का रुख किया था, यमराज की बहन यमी ने उनके माथे पर तिलक लगाकर सलामती की दुआ मांगी थी। इस पर यमराज ने अपनी बहन को हमेशा इस दिन उसके पास आने का वचन दिया। मान्यता है। कि इस दिन जो भी भाई अपनी बहन से माथे पर तिलक लगबाता है। उसकी लंबी आयु होती है। एक अन्य कथा के अनुसार भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध करने के बाद अपनी बहन सुभद्रा के घर का रुख किया था। कृष्ण की बहन सुभद्रा ने दिए जलाकर भाई का स्वागत किया था।और तिलक लगाकर लंबी उम्र की दुआ मांगी थी। तभी से यह भाई बहन के अगाध प्रेम का प्रतीक भाई दूज का त्यौहार मनाया जाने लगा।
गोवर्धन पूजा कर श्रद्धालुओं ने की भगवान श्री कृष्ण की आराधना
देश सहित महानगर में भी पूरे उत्साह के साथ घर-घर में गोवर्धन पूजा कर भगवान श्री कृष्ण की आराधना की गई। इस पावन अवसर पर आंगन में गोबर से गोवर्धन की श्रद्धालुओ ने आकृति बनाई और पूरे विधिवत उसका पूजन किया। साथ ही अन्नकूट का भोग भी लगाया। सर्वविदित है कि दिवाली के अगले दिन मनाई जाती है। इस दिन घर में किसी जगह ज्यादातर आंगन में गोबर से गोवर्धन पर्वत, गायों, ग्वालों आदि की आकृति बनाकर पूजा-अर्चना की जाती है। साथी ही परिक्रमा कर छप्पन भोग का प्रसाद बांटा जाता है। इस दिन अन्नकूट बनाने का भी खास महत्व है, इसलिए इसे अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने इंद्र का अभिमान चकनाचूर कर बृजवासियों की रक्षा की थी, इसलिए इस दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा का भी विशेष महत्व है।