भाजपा जीत के लिए बांट रही नोट : जसविंदर

Oct 29 2020

ग्वालियर। जनादेश को पलट कर सौदेबाजी से सरकार बनाने वाली भाजपा ने साबित कर दिया है कि उसका जनता और जनतंत्र में कोई विश्वास नहीं है, इसीलिए पहले 22 विधायकों का अपहरण कर बैंगलुरू में 35.35 करोड़ रुपए में खरीदकर सरकार बनाने के छह महीने बाद भाजपा जनता का मूड भांप गई है। इसलिए नए भाजपाई चुनाव जीतने के लिए कहीं सौ-सौ के नोट बांट रहे हैं। कहीं पर्चों के साथ पांच-पांच सौ के नोट बांटे जा रहे हैं और कहीं प्रशासन के भरोसे कह रहे हैं कि चुनाव तो कलेक्टर ही जितवा देगा। यह बात प्रेस कांफेंस में पार्टी के प्रदेश सचिव जसविंदर सिंह ने कही।
भाजपा समझ गई है कि चुनावों में अब उसे जनता का समर्थन नहीं मिलने वाला है, इसलिए वो प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है। चुनाव आयोग के आदेशों के बाद भी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को नहीं हटाया जा रहा है। मगर भाजपा की यह तिकड़में कामयाब होने वाली नहीं है। पुराने और निष्ठावान भाजपाईयों को किनारे कर खरीद कर लाये गए नए भाजपाइयों की ताजपोशी से भाजपा भीतरघात से जूझ रही है। भाजपा को अपने निष्ठावान कार्यकर्ताओं पर भरोसा नहीं बचा है, इसलिए भाजपा नेतृत्व उन्हें अपनी विधानसभा छोड़कर दूसरे विधान सभा क्षेत्रों में प्रचार के लिए भेजा जा रहा है। मगर इसके बावजूद भाजपा ने दीवार पर लिखी हार की इबारत को पढ लिया है। इसीलिए गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा सिर्फ एक सीट जीतने की बात कह रहे हैं और मुख्यमंत्री खुद को टेंपरेरी और झोला टांग कर निकल जाने की हताश बातों के साथ ही और विधायकों को खरीदने के दावे कर लोकतंत्र को कलंकित करने की घोषणायें कर रहे हैं। पिछले दो सप्ताह से भाजपा नेताओं की ज्योतिरादित्य सिंधिया से दूरी साबित करती है कि वह अब हार का ठीकरा उन्हीं के सिर फोडना चाहते हैं। उनकी असंतुलित और अमर्यादित भाषा भाजपा को रास नहीं आ रही है। यह दूरियां भी भाजपा की हार के बाद और बढ़ेगी। हमारी पार्टी इन उप चुनावों में बुनियादी मुद्दों को भटकाने की कोशिश की निंदा करती है।