मुनि प्रतीक सागर की 40 वीं जन्म जयंती पर गुरुभक्तों ने गुरुपूजन किया

Oct 25 2020

ग्वालियर। दिगंबर जैन परंपरा के विख्यात गणाचार्य श्री पुष्पदंत सागर महाराज के सुयोग्य शिष्य क्रांतिवीर मुनि प्रतीक सागर महाराज की 40 वीं जन्म जयंती महोत्सव हर्षोल्लास पूर्वक आचार्य धर्म भूषण महाराज की पावन सानिध्य में आचार्य पुष्पदंत सागर सभागृह सोनागिर में मनाया गया। भक्तों में भारी उत्साह  और उल्लास नजर आया।
चतुर्मास प्रचार संयोजक सचिन जैन ने बताया कि महोत्सव का प्रारंभ प्रात: संगीतकार अनुपमा जैन ग्वालियर द्वारा संगीतमय भक्ति गुरु पूजन से किया गया। जिसमें भक्तों ने सुंदर-सुंदर थानों में जल, चंदन, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, दीप, धूप, फल आदि द्रव्य को भक्ति नृत्य करते हुए मुनि प्रतीक सागर महाराज की पूजन कि गई। तत्पश्चात दोपहर 1 बजे से जन्मोत्सव का आयोजन प्रारंभ हुआ। नृत्य मंगलाचरण के द्वारा ग्वालियर की बालिकाओं द्वारा सुंदर नृत्य की प्रस्तुति दी गई ।आचार्य पुष्पदंत सागर महाराज एवं आचार्य विमल सागर महाराज के तैल चित्र का अनावरण किया गया अनावरण करने का सौभाग्य राजेन्द्र जैन देवेन्द्र कुमार डवरा जितेन्द्र जैन डवरा राजू जैन डवरा सुरेश जैन दमोह, दीपक जैन भिण्ड  दीप प्रज्वलन रतन सेन जैन भिण्ड, नरेश चौधरी डवरा, आशीष जैन डवरा, सुनिल लोहिया ग्वालियर, नीरज जैन डवरा, मनोज टाईगर ग्वालियर राहुल ग्वालियर।  मुनि प्रतीक सागर जी महाराज के 8 प्रकार के विभिन्न सामग्रियों से पादप्रक्षालन किया गया दूध, दही, केसर जल, सर्वोषधी, अनन्नास रस, अंगूर रस, मोसंबी रस ,अनार रस द्वारा। मुनि के प्रमुख पादप्रक्षालन कर्ता राजेन्द्र जैन देवेन्द्र जैन डवरा थे। मुनि  को शास्त्र भेंट नारायण जैन सोनु जैन हलवाई डवरा ने किया। बाहर से पधारे हुए समाज एवं भक्तों द्वारा मुनि श्री को श्रीफल भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
 दुनिया व्यक्ति को याद नहीं रखती, उनके द्वारा किए  गए कार्यों को याद रखती है मुनिश्री
गुरु भक्तों ने विनंयजलि के द्वारा मुनि के गुणों का गुणगान करते हुए कहा कि मुनि प्रतीक सागर महाराज ने देश समाज और राष्ट्र में 22 साल की साधना काल में वैचारिक क्रांति और नैतिकता की स्थापना की है। जिसे समाज कभी भुला नहीं सकता है। मुनि शांति और क्रांति दूत है। मुनि के प्रवचनो मैं महावीर की अहिंसा बुद्ध की करुणा जीसस का प्रेम झलकता है इस अवसर पर आचार्य धर्म भूषण महाराज ने कहा कि मुनि इस छोटी सी उम्र में जो साधना और प्रभावना के कीर्तिमान स्थापित किए हैं जिन्हें बड़े-बड़े संत भी नहीं बना सकते मुनि करुणा के सागर है। मुनि ने जन्मोत्सव सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जन्म तो सभी प्राप्त करते हैं मगर जो जन्म को सार्थक कर ले वह दुनिया में हमेशा याद रखा जाते है। दुनिया व्यक्ति को याद नहीं रखती व्यक्ति के द्वारा  किए  गए कार्यों को याद रखती है। लोग कहते हैं देवता अमर है क्योंकि वह अमृत पीते हैं मगर जो दुनिया में हटकर के करता है और हट करके देता हैं वह भी दुनिया में अमर हो जाता है। अमर होने के लिए दो काम जरूर करें। पढऩे लायक कुछ लिख दे या लिखने लायक कुछ कर जाए। मुनि ने आगे कहा कि परिवार और समाज में आज शांति और अमन समाप्त होता जा रहा है उसका कारण है कि प्रभु और गुरु के प्रति आस्था के भाव कमजोर पड़त जाना । जिस कारण दुख और दरिद्रता ने अपने पैर पसारना प्रारंभ कर दिया है ।भगवान के श्री चरणों में लक्ष्मी का निवास है जो उनकी सच्चे मन से भक्ति और आराधना करता है उसे सुख शांति समृद्धि सभी प्राप्त होती है। धन कमाने के चक्कर में जब धर्म को व्यर्थ समझने लगते हैं तो उनका जीवन मकड़ी के जाल में फस कर समाप्त हो जाता है। इसलिए दुनिया में तीन तरह की आत्माएं  जन्म लेती है। एक वह जो जन्म और मरण को जीत लेती हैं उनका जन्म कल्याणक मनाया जाने लगता है वह तीर्थंकर भगवान है। दूसरी जो जन्म और मरण को जीतने के लिए अपनी यात्रा प्रारंभ कर देते हैं उनकी जन्म जयंती मनाई जाती है वह मुनिराज। तीसरे जो खाओ पियो ऐश करो कि युक्ति पर चलते हैं उनका बर्थडे मनाया जाता है यानी बर्थडे। जन्मदिन खुशी मनाने का दिन नहीं अपितु जिंदगी के अनमोल पलों में से इतने वर्ष कम हो गए उस पर विचार करने की दिन है। जन्म दिवस चेतावनी दिवस है मृत्यु शीघ्र ही तुम्हारा वरण करेगी ।भारत देश अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का मार्ग दर्शन देता है इसीलिए दीप जलाया जाता है बुलाया नहीं जाता है। आप जब अपना जन्म दिवस मनाए तो मोमबत्ती बुझा कर, केक ना काटे। अपितु भगवान के चरणों में दीप जलाकर अपने जीवन को अज्ञान के अंधेरे से निकालकर ज्ञान के प्रकाश में डूब जाए ।