सज गई दशानन की मंडी, विजयादशमी का पर्व मनेगा आज

Oct 24 2020

ग्वालियर। असत्य पर सत्य की जीत विजयादशमी का पर्व आज 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा, जिसकी तैयारियां शुरु हो गई हैं। इस दिन अहंकार का नाश करते हुए रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतलों का दहन किया जाएगा। हर वर्ष बड़े-बड़े पुतलों का दहन कई स्थानों पर किया जाता रहा है लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते बड़े पुतलोंका दहन नहीं होगा और घर-घर और गली मोहल्लों में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले जलाए जाएंगे, जिसके लिए रावण की मंडी सजकर तैयार हो गई है। दुकानदारों ने छोटे से लेकर बड़े पुतले तैयार किए हैं जिसकी कीमत 50 रुपए से लेकर दो हजार रुपए तक है।
लंकापति दशानन महाज्ञानी थे लेकिन अहंकार के कारण भगवान श्रीराम ने इनका वध किया था और इस दिन से असत्य पर सत्य की जीत का पर्व विजयादशमी (दशहरा) मनाया जाता है। इस दिन अहंकार का नाश करते हुए रावण के पुतलों का दहन भी होता है। भगवान श्रीराम की लीलाओं का मंचन शहर के कई स्थानों पर किया जाता है और दशहरे पर चल समारोह निकालने के साथ ही रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के विशाल पुतले जलाए जाते हैं जिसे देखने के लिए सैकड़ों लोगों की भीड़ एकत्रित होती है, लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते बड़े पुतलों का दहन नहीं होगा। गली मोहल्लों और बाजारों में पुतलों का दहन कियाजाएगा, जिसके लिए छप्पर वाले पुल के आसपास रावण की मंडी सज गई हैं छोटे से बड़े रावण, कुंभकर्ण और मेघनाथ के पुतले तैयार कर दुकानदार बेच रहे हैं।
नहीं भरी है आतिशबाजी
दुकानदारों द्वारा जो पुतले तैयार किए गए हैं उसमें बांस, सुतली, रंगीन पेपर का उपयोग तो किया है लेकिन आतिशबाजी, पटाखों से दूरी बनाई है। बड़े-बड़े पुतलों में आतिशबाजी भरी जाती है और रंग- बिरंगी रोशनी और चकरी भी लगाई जाती है जैसे ही इन पुतलों को जलाया जाता है तो चकरी घूमने लगती है और रोशनी से मैदान रंग-बिरंगा हो जाता है लेकिन इन पुतलोंमें आतिशबाजी नहीं भरी है।
नहीं निकलेगा चल समारोह
दशहरे पर भगवान श्रीराम का विशाल चल समारोह छत्री मैदान रामलीला समिति द्वारा निकाला जाता है तो वहीं दीनदयाल रामलीला समिति द्वारा भी चल समारोह निकाला जाता है लेकिन कोरोना के चलते इस बार रामलीला का मंचन नहीं किया जा रहा है जिसके चलते चल समारोह भीनहीं निकाला जाएगा। रामलीला समिति के रमेश अग्रवाल ने बताया कि कोरोना के चलते आयोजन नहीं किया गया है और पुतले बनाने को ऐन समय पर कारीगर भीतैयार नहीं हुए। शहर के थाटीपुर और जीवाजी क्लब में भी पुतलों का दहन किया जाता है लेकिन उस पर भी असमंजस भी है।