वल्र्ड फूड डे पर, ग्वालियर की सारिका बहरोलिया और आभा परमार ने ग्वालियर के फूड डेस्टिनेशन्स के बारे में बताया

Oct 15 2020

ग्वालियर। भारतीय पकवानों में बहुत सारी विविधतायें हैं। अगर खाने-पीने के सामानों की बात करें, तो हर जगह की अपनी कुछ खासियत होती है और कई पारंपरिक व्यंजन उस क्षेत्र से जुड़े होते हैं। खान-पान की यह विविधता भारत की एक सर्वाधिक महत्वपूर्ण खासियत भी है। वल्र्ड फूड डे के अवसर पर, ग्वालियर निवासी और एण्डटीवी के 'गुडिय़ा हमारी सभी पे भारी' की अभिनेत्रियों सारिका बहरोलिया (गुडिय़ा) और आभा परमार (पुतली बाई) ने ग्वालियर के अपने पसंदीदा पकवानों और खाने-पीने के लिये मशहूर स्थानीय जगहों के बारे में बताया। सारिका कहती हैं, ''बात यदि खाने की हो, तो मैं पूरी तरह से 'चटोरी' हूं। ग्वालियर में खासतौर से शाकाहारी लोगों के लिये कई तरह के पकवान मिलते हैं। कचौरी, समोसे, पोहा और बेड़ई से लेकर कबाब, भुट्टे की कीस, दाल बाफला, जलेबी, इमरती, रोगन जोश, मावा-बाटी, मालपुआ और मोरेना गजक जैसे स्थानीय व्यंजनों तक यहां पर कई डिशेज मिलती हैं। बहादुर की कचौरी और लड्डु मुझे सबसे ज्यादा पसंद हैं। यह दुकान काम्पू में स्थित है, जहां पर मोतीचूर के बेस्ट लड्डु और देशी घी की कचौरी मिलते हैं। साथ ही मुझे पोहा और जलेबी, समोसा, बेड़ई, आलू की सब्जी एवं चटनी के साथ कचौरी भी बहुत अच्छे लगते हैं। आभा परमार ने कहा, ''यदि आपको ग्वालियर का असली स्वाद चखना है, तो आपको यहां की मशहूर एसएस कचौरीवाला और बहादुर के लड्डु एवं अग्रवाल पोहा भंडार जरूर जाना चाहिये। इसके साथ ही यहां पर एक खास तरह की ट्रैडिशनल पानी पूरी भी मिलती है, जिसे लंबी पानी पूरी कहा जाता है और यह एक छोटे खीरे के आकार की होती है। यहां की केरला चाट भी काफी मशहूर है, जो पापड़ी चाट की तरह होती है, जिसकी पापड़ी का नाम करेला के नाम पर रखा गया है। यदि आप पारंपरिक मिठाईयों का स्वाद लेना चाहते हैं, तो पंछीराज की पेठा गिलौरी, जोधपुर मिष्ठान भंडार की पनीर जलेबी और दौलत राम गजक भंडार की मोरेना गजक जरूर खायें। वल्र्ड फूड डे पर मैं सभी को यही संदेश देना चाहूंगी कि हम सभी को हर दिन जो भोजन मिलता है, उसके लिये हमें भगवान का शुक्रिया अदा करना चाहिये और खाना फेंकना नहीं चाहिये, बल्कि भूखे लोगों को खिला देना चाहिये।