किसानों की व्यथा सुनने को तैयार नहीं बिजली अफसर, रोशनीघर में ही डाले बिस्तर, सुबह से फिर किया प्रदर्शन

Oct 14 2020

ग्वालियर। बिजली बिलों में गड़बड़ी को लेकर आंदोलित किसानों ने  जुलूस के साथ रोशनीघर स्थित महा प्रबंधक ( शहर वृत्त) के दफ्तर का घेराव कर जमकर प्रदर्शन किया, लेकिन उनकी समस्या सुनने कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं आया। ऐसे में किसानों ने रात में रोशनीघर परिसर में ही डेरा जमाते हुए बिस्तर डाल लिए और सुबह दफ्तर खुलते ही फिर झंडे-बैनर लेकर प्रदर्शन शुरु कर दिया। इनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जाती, वह घर वापस नहीं लौटनेवाले, बल्कि आंदोलन को और तेज किया जाएगा, इन्होनेअन्य किसानों से भी इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।
यहां प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आज साफ कहा कि शासन के इसारे पर ही बिजली विभाग काम कर रहा है, केंद्र सरकारका कृषि अध्यादेश इसका नमूना है, वहीं यहां किसानों को सिंचाई पंपो के बिल मीटर रीडिंग के आधार पर पकड़ा दिए जाने की बात करें तो साफ हो जाता है कि सरकार किसानों को मिटाने में लगी है। एक से डेढ़ और दो लाख तक के बिल किसानों को दिए जा रहेहैं, जिन्हें अदा करना लगभग असंभव है, इसे लेकर कई बार बिजली कंपनी के अधिकारियों से गुहार लगाई गई, लेकिन कोई हल नहीं निकला।
किसानों ने कहा कि नगर निगम ने ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर छह नये वार्ड बनाये हैं, जिससे वार्डो की संख्या 60 से बढ़कर 66 हो गई है। इन्ही वार्डों में दिक्कत दी जा रही है। सिंचाई के लिए पंपों पर फ्लेट रेट से बिजली बिल थमाए जा रहें है। वार्ड 65 जिसमें गिरवाई, अजयपुर, वीरपुर आदि गांव शामिल है, जिसमें सब्जी उत्पादक किसान ही सबसे ज्यादा हैं। चार साल पहले वर्ष 2016 अप्रैल माह से पंप के फ्लेट रेट खत्म करके मीटर रीडिंग के आधार पर बिल भेजना शुरू कर दिया गया है। लॉकडाउन में सब्जी और फूल उत्पादक किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। अब हकीकत यह है कि इन वार्डों के किसानों को मोटी रकम के बिल पकड़ा दिए गए हैं। यह सहन नहीं किया जाएगा।