बिजली महाप्रबंधक का दफ्तर घेरेंगे किसान

Oct 11 2020

ग्वालियर। गत 28 सितंबर को किसानों ने माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, जन अधिकार पार्टी और मध्यप्रदेश किसान सभा की ओर से विद्युत मंडल पर प्रदर्शन किया था तब महाप्रबंधक द्वारा सात दिवस में समस्या का समाधान निकालने का आश्वासन दिया था, लेकिन 12 दिन बीत चुके हैं, फिर भी अधिकारी कोई ठोस समाधान बताने को तैयार नही है। इससे पहले भी स्थानीय विधायक से लेकर ऊर्जामंत्री तक से गुहार लगाई जा चुकी है लेकिन सब उद्योगपतियों के साथ है, बिजली अधिकारियों को भी उद्योगों से मोटा कमीशन मिल रहा है। किसान के साथ केवल उनकी एकता है और उसी दम पर अपनी जायज मागों को मनवाने के लिए किसान एकजुट होकर 12 अ?क्टूबर को गोलपहाडिय़ा चौराहे से सुबह 10 बजे जुलूस के साथ रवाना होंगे और बिजली महाप्रबंधक कार्यालय का घेराव करेगें। 
यह बात पत्रकार वार्ता में माकपा जिला सचिव अखिलेश यादव, सुग्रीव सिंह कुशवाह, नाहर सिंह, जंडेल सिंह, कल्लू लोधी, गणेश भगत ने कही। उन्होने कहा कि ग्वालियर में बिजली वितरण कंपनी मनमाने कानून लागू कर रही है, ''कैसे भी हो- मुनाफा हो'' उनका सूत्र वाक्य बन गया है।  नगर निगम में शहर के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर छह नये वार्ड बनाये गये थे, जिससे ग्वालियर नगर निगम में वार्डों की संख्या 60 से बढकर 66 हो गई है। नये 6 वार्डो में आने वाले कृषकों से सिंचाई के लिए पंपों पर फ्लेट रेट से बिजली बिल लिये जा रहें है। वार्ड 65 जिसमें गिरवाई, अजयपुर, वीरपुर आदि गांव शामिल है, जिसमें सब्जी उत्पादक किसान बहुतायत में है। वर्ष 2016 के अप्रैल माह से केवल वार्ड 65 किसानों के पंप से फ्लेट रेट खत्म करके मीटर राडिंग के आधार पर बिल भेजना शुरू कर दिया गया है। सब जानते हैं कि दुनिया के किसी भी देश में किसान को सरकारी सरंक्षण नहीं मिलेगा तब तक किसान और खेती को बचाया नहीं जा सकता है। केन्द्र सरकार जब सब कुछ बेच (निजीकरण कर) डालेगें की तर्ज पर किसानों और खेती को बर्बाद करने पर आमादा है। नया कृषि कानून किसानों की बर्बादी का मसौदा है। यहां पर हम इस बात को भी रेखांकित करना चाहतें है कि कोरोना महामारी के लॉकडाउन में सब्जी और फूल उत्पादक किसानों की सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। हालत यह है कि एक एक किसान पर एक लाख से डेढ़ लाख तक का बिल थोप दिया गया है।