सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा- विकास विरोधी थी कांग्रेस सरकार

Oct 11 2020

ग्वालियर। कांग्रेस सरकार बनाने में ग्वालियर-चंबल का महत्वपूर्ण स्थान था और अंचल से कांग्रेस को 34 में से 26 विधानसभा सीटें मिली थी, जैसे ही सरकार बनी, कमलनाथ ने अंचल से चुने हुए प्रतिनिधियों की अनदेखी करना शुरू कर दिया था। इसी वजह से कांग्रेस की सरकार गई और अब भाजपा की सरकार है। अब कमलनाथ सरकार जाने पर पूछ रहे हैं कि मेरा क्या कसूर था।
यह बात राÓयसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पूर्व विधानसभा सीट के रामकृष्ण मंडल में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कही। कार्यक्रम में मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह, पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन, माया सिंह, धीर सिंह तोमर, पूर्व महापौर श्रीमती समीक्षा गुप्ता, शरद गौतम, रामेश्वर भदौरिया, विजय सक्सैना, हरिमोहन पुरोहित सहित कई नेता उपस्थित थे।
उन्होंने कहा कि 15 महीने प्रदेश में कांग्रेस की सरकार रही और मुख्यमंत्री कमलनाथ रहे, लेकिन न तो गरीबों को पट्टा मिला और न ही विकास का काम हुआ। केवल जनता के साथ वादा खिलाफी हर मामले में हुई। वल्लभ भवन भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया। जो व्यक्ति ग्वालियर-चंबल के साथ वादाखिलाफी करे, वो जनता का गद्दार है। अब मैं भाजपा के परिवार का हिस्सा हूं और उस कार्यकर्ता के साथ हूं, जो पार्टी की नींव है। कार्यकर्ता के लिए मतदान केन्द्र एक किले के समान है और इसकी रक्षा करनी है। इन बूथों की रक्षा करते हुए पूरे प्रदेश में 28 सीटों पर कांग्रेस का सूपड़ा साफ करते हुए उनके बंद मिलते थे दरवाजे।
श्री सिंधिया ने कहा कि मुन्नालाल गोयल यहां के विधायक थे, वे जब भी सड़क, बिजली, पानी की समस्या लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ के पासे जाते तो उनके दरवाजे बंद मिलते थे।
इसलिए अब ग्वालियर-चंबल की जनता को कमलनाथ और कांग्रेस के लिए दरवाजे बंद करने हैं। अब श्री गोयल को जिताकर सभी लोग केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व ज्योतिरादित्य सिंधिया को जिताने का काम करेंगे। ग्वालियर पूर्व के प्रत्याशी मुन्नालाल गोयल ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि जनता के विकास के लिए मुझे जनप्रतिनिधि चुना। 
बिजली, पानी सड़क की बदहाली को लेकर कई बार मैं मुख्यमंत्री कमलनाथ से मिला, लेकिन एक काम भी 15 महीने में नहीं हुआ। इससे मेरा नहीं, बल्कि मेरी जनता का अपमान हुआ। इसलिए श्री सिंधिया के नेतृत्व में 22 विधायकों को कांग्रेस का साथ छोडऩा पड़ा।