निगमायुक्त की चेतावनी का भी असर नहीं, सुबह से नदारद फील्ड से ईकोग्रीन की गाडिय़ा

Oct 10 2020

ग्वालियर। ईकोग्रीन कंपनी की हठधर्मी इस कदर है कि उसके द्वारा निगमायुक्त की चेतावनी को भी नजर अंदाज कर दिया गया है। शुक्रवार को ही इसे ठीक से काम करने का अल्टीमेटम दिया गया था, लेकिन शनिवार सुबह से फिर इसकी गाडिय़ां और कर्मचारी फील्ड से नदारद हैं और सारे शहर में कचरे के ढेर लग गए हैं, हकीकत तो यह है कि निगम के अफने कर्मचारी लगाकर शहर को साफ रखने के दावे भी खोखले साबित हुए हैं, कई क्षेत्र तो ऐसे हैं, जहां बीते तीन दिन से सफाई कर्मचारी कचरासमेटना तो दूर झाड़ू लगाने भी नहीं पहुंचे हैं।
इधर जहां निगमायु?त का यह कहना है कि जल्द ही ईकोग्रीन कंपनी को लेकर अंतिम फैसला ले लिया जाएगा, वहीं कंपनी के क्षेत्रीय प्रबंधक इस मसले पर किसी भी तरह कीप्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं।
शहर में सफाई का जिम्मा तीन स्तर पर है। इसमें जहां निगम के पास एक हजार स्थायी कर्मचारी हैं, वहीं 1900 आउटसोर्स कर्मचारी। इनके अलावा हर माह 35 लाख रुपए के खर्च पर चीन की ईकोग्रीन कंपनी को भी ठेका दे दिया गया था, वहीं इसे 178 गाडिय़ां भी कचरा समेटने के लिए उपलब्ध कराई गईं हैं। इसके बावजूद भी शहर की सफाई व्यवस्था पिछले कुछ दिनों से पूरी तरह से ध्वस्त है, जबकि बड़ी तैयारी के साथ स्वच्छता रैंकिग में प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल किया था, लेकिन अब हालात ठीक विपरीत हैं। 
इधर नगर निगम के स्वास्थ्य उपायुक्त सत्यपाल सिंह चौहान का कहना है कि शहर के सबसे बड़े कचरा डंपिंग ग्राउंडों की सफाई की जाएगी, इनमें लक्ष्मीगंज स्थित बुध्दा पार्क व ट्रिपल आईटीएम शामिल हैं। यहां से कचरा न उठने के कारण यह ऑवरलोड हो गए हैं, इस कचरे को निगम के वाहन लैंडफिल साइट पहुंचाएंगे। आधा सैकड़ा से अधिक वाहनों के बावदूज यहां से कचरा समेटने में तीन से चार दिन का समय लगेगा, लेकिन फिर लंबे समय तक इनका उपयोग किया जा सकेगा।