कांग्रेस का सिंधिया पर हमला, ज्येन्द्रगंज की वेशकीमती जमीनों पर किया अवैध कब्जा

Oct 03 2020

ग्वालियर। मध्यप्रदेश कांग्रेस ने भाजपा के राज्य सभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया पर आज फिर एक बार हमला बोला है। इस बार फिर कांग्रेस ने ज्येन्द्रगंज स्थित माहोरकर के बाडे की 8 बीघा 2 विस्वा भूमि जिसकी कीमत लगभग 350 करोड है को पूर्व राजघराने की संपत्ति की सूची में शामिल भी नहीं है, फिर भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उस पर अवैध कब्जा कर वहां रह रहे लोगों से किराया वसूली की वहीं कूट रचित दस्तावेजों से इसमें से कुछ हिस्सा बेच भी दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला भ्रष्टाचार अधिनियम 1998 की धाराओं में आता है। उन्होंने चेतावनी भी दी कि वह इस पूरे मामले को लेकर शीघ्र ही उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटायेंगे। 
मप्र कांग्रेस के प्रवक्ता केके मिश्रा वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुरारीलाल दुबे ने पत्रकारों से चर्चा करते हुये कहा कि जब सिंधिया राज का भारत में विलय हुआ उसकी इनवेन्टरी सूची क्रमांक एक में जयविलास पैलेस की बाउंड्री स्पष्ट है। उसमें माहोरकर का बाडा शामिल नहीं है। पैलेस के बाहर भवन क्रमांक642 बाडे के नंबर के रूप में अंकित है। उपलब्ध रिकार्ड के अनुसार ग्वालियर गर्वमेंट ने 76000 रूपये में सरकारी खजाने से भुगतान कर 1918 में जानवरी कारखाने के लिये लिया था। जिसका कब्जा पीडब्ल्यूडी के प्रशासनिक अधिकारी द्वारा लिया गया। इस लिहाज से यह बाडा मध्य भारत उसके बाद मध्यप्रदेश बाद मं नगर निगम की संपत्ति में शामिल हो गया। ग्वालियर राजघराने ने कूट रचित दस्तावेज तैयार कर अपने अपंजीकृत ट्रस्ट देवस्थान ट्रस्ट में 10 मार्च 1969 को इसे रजिस्टर्ड भी करवा लिया। वहीं 22 दिसंबर 1964 में अवैध रूप से अपने अधिपत्य में ले ली। इस संपत्ति से किराया वसूली भी शुरू कर दी। 
नेताओं ने कहा कि इसके बाद देवस्थान ट्रस्ट ने नगर निगम के अधिकारियों से मिलकर इसका नामांतरण भी करवा लिया। जिसे 6 दिसंबर 1975 में तत्कालीन नगर निगम आयुक्त ने निरस्त कर दिया। उन्होंने कहा कि जब यह इनवेन्टरी में नहीं तो यह इनवेन्टरी का हिस्सा कैसे हो गया। उन्होंने कहा कि 20 अगस्त 1964 को राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने भारत सरकार के सचिव गृह मंत्रालय वी विश्वनाथन को लिखे एक शिकायती पत्र में कहा कि हमारे आधिपत्य की जमीनों पर प्रशासन रोक लगा रहा है। इस शिकायत के बाद महल के अधिकारियों और राजस्व विभाग के प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा की गई संयुक्त जांच में माहोरकर का बाडा सर्वे क्रमांक 576-577 न केवल नगर निगम के आधिपत्य में होना पाया बल्कि प्रकरण के नामांनतरण करने से भी आयुक्त नगर निगम ने इंकार कर दिया। ट्रस्ट मैनेजर द्वारा राजस्व अधिकारी के समक्ष प्रार्थना पत्र देने पर प्रकरण पुन: शुरू हुआ और राजस्व अधिकारी द्वारा पारित आदेश 03 मार्च 1972 द्वारा नामांकन स्वीकर कर लिया गया। जिस पर मप्र शासन द्वारा कलेक्टर अपील की जिसे 02 जून 1975 के द्वारा दोनों पक्षकारों को पुन: सुनवाई 05 जून 1975 को उपस्थित होने को कहा। देवस्थान विरूद्ध मप्र शासन के निर्णय में कलेक्टर ने ट्रस्ट का नाम हटाकर जानवरी कारखाने की मिल्कियत सरकार लिखने का आदेश पारित किया। और अनुविभागीय अधिकारी सक्षम प्राधिकारी ग्वालियर ने 22 दिसंबर 194 से किराया भी ट्रस्ट से वसूलने का आदेश जारी किया। इतना ही नहीं मप्र शासन भोपाल रिमूव्हल ऑफ अनलॉफुल पजेशन ऑफ देवस्थान ट्रस्ट का पत्र तत्कालीन कलेक्टर आरके गुप्ता को भेजा । वहीं मप्र विधानसभा ने पूरक प्रश्र क्रमांक 4060 में भी राज्य सरकार से भूतपूर्व महाराजा ग्वालियर द्वारा अवैध रूप से किये गये कब्जे और उसे न हटाये जाने की बात उल्ले,िात की। वहीं राजपरिवार ने किराया वसूलना स्वीकार किया और यह भी कहा कि यह बाडा माधौराव सिंधिया व श्रीमति विजयाराजे सिंधिया द्वारा 1969 में सिंधिया देवस्थान ट्रस्ट को दान पत्र के द्वारा दिया गया है। इस पर वर्तमान में सिंधिया देवस्थान ट्रस्ट का आधिपत्य है। वहीं कलेक्टर ने इसे शासकीय संपत्ति बताते हुये सिंधिया परिवार के किसी सदस्य को किराया नहीं देने के निर्देश दिये थे। इसके बाद भी ट्रस्ट द्वारा आज भी अवैध कब्जा कायम है और किराया वसूली भी जारी है। इस पर रोक लगाई जानी चाहिये। 
नेताओं ने यह भी कहा कि उक्त सभी शासकीय आदेशों के उपरांत भी तत्कालीन तहसीलदार ग्वालियर ने अपने प्रकरण के आदेश में 03-08-1988 द्वारा सिंधिया परिवार के आवेदन के बिना ही इसका नामांतरण कर दिया जो घोर अनियमितता, घपला घोटाला आर्थिक भ्रष्टाचार बताता है। 
वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुरारीलाल दुबे ने बताया कि वह कई शिकायतें सिंधिया परिवार के खिलाफ कर चुके हैं लेकिन अपने प्रभाव से सिंधिया परिवार उन शिकायतों को नष्ट करा देता है। इसका उदाहरण एक शिकायत के मामले में जब आरटीआई से जानकारी मांगी तो शासन ने फिर से शिकायत देने की बात कही। पत्रकार वार्ता में चुनाव पर्यवेक्षक मनोज त्रिवेदी, प्रवक्ता प्रदेश आरपी सिंह, ऋषभ भदौरिया जिला प्रवक्ता धर्मेन्द्र शर्मा भी मौजूद थे।