धर्म है तो पाप नहीं और यदि पाप है तो धर्म नहीं-मुनिश्री
Sep 20 2020
ग्वालियर। धर्म और पाप का तो कोई संबंध ही नहीं है। यदि धर्म है तो पाप नहीं हो सकता। यदि पाप है तो धर्म नहीं है। धर्म कतिपय कर्मकांडों, रीति-विधानों और आख्यान-व्याख्यान का ही नाम नहीं है। धर्म एक आस्था है-मन की और आचरण की। इस आस्था को प्राप्त करने के लिए ज्ञान चाहिए। यह ज्ञान चाहिए कि सच क्या है। परमात्मा एकमात्र सच है, क्योंकि वह काल से परे अविनाशी शक्ति है। परमात्मा ही धर्म है। यह बात क्रांतिकारी मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज ने रविवार को सोनागिर स्थित आचार्यश्री पुष्पदंत सागर सभागृह में धर्मसभा में संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
मुनिश्री ने कहाकि धर्म कभी नही सिखाता है किसी से वैर, नफरत करना। जहां धर्म है वहां अधर्म वाला कार्य हो ही नही सकता और इसी प्रकार से जहां अधर्म है वह धर्म नही हो सकता। मुनिश्री ने कहा संसार मे एक कहावत प्रचलित है जैसा किसी के साथ व्यवहार करोगे वैसे ही व्यवहार खुद पाओगे। अगर किसी के लिए कांटे बीजोगे तो कांटेगे ही पथ पर मिलेगें। विश्व भर के अनगिनत प्राणियों में मानव ही सर्वश्रेष्ठ है।
मनुष्य चाहता है कि उसे सभी प्रकार का सुख मिले
मुनिश्री ने कहाकि मनुष्य से बढ़क़ और कोई प्राणी नहीं है। मनुष्य में ही ऐसी शक्ति है, जो धर्म और अधर्म के संबंध में गंभीरता से विचार करता है और बुरे कार्यो को छोड़कऱ व पुण्य और धर्म को अपनाकर साक्षात्कार कर सकता है। प्रत्येक मनुष्य चाहता है कि उसे सभी प्रकार का सुख मिले। धन, परिवार, निरोगी शरीर, दीर्घ आयु आदि सुख पुण्य से प्राप्त होते हैं। बुरे कार्यो का परिणाम कष्टदायक है। इसीलिए पाप करने वाले मनुष्य भी पापों के परिणाम से बचने की सोचते हैं। 'जो जैसा करेगा, वैसा ही भरेगा। यह मानी हुई बात है। यह बड़े आश्चर्य की बात है कि लोग पापों के परिणाम से बचना चाहते हैं, पर पाप-प्रवृत्तियों को छोडऩे के लिए तैयार नहीं होते।
मुनिश्री ने आगे कहा पुण्य के परिणामस्वरूप सुख को सभी चाहते हैं, पर परोपकार आदि पुण्य-कार्र्यों में प्रवृत्त नहीं होते। चाहते कुछ और हैं और प्रवृत्ति करते हैं उसके विपरीत। यही आश्चर्य की बात है। मन, वचन, और शरीर के जरिये कोई भी पाप-प्रवृत्ति हो रही हो, तो उसे रोकना धर्म है।
मुनिश्री से समाजजनों ने चित्र आवरण कर आशीर्वाद लिया
चातुर्मास समिति के प्रचार संयोजक सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि धर्म सभा के पहले समाजजनों ने आचार्यश्री पुष्पदंत सागर महाराज के चित्र का आवरण कर मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज से मंगल आर्शीवाद लिया। धर्मसभा का शुभारंभ आचार्यश्री पुप्षदंत सागर के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। मुनिश्री के मंगल प्रवचन प्रतिदिन आचार्य पुष्पदंत सागर सभागृह में आयोजित किए जाएंगे।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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