कांग्रेस ने सिंधिया पर लगाये जमीन घोटाले के दस्तावेजी आरोप
Sep 18 2020
ग्वालियर। मध्यप्रदेश कांग्रेस नेताओं ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया पर खरबों रूपयों की जमीनों का घोटाला कर कलेक्टर पर दबाब देकर उसे अपने नाम कराने का आरोप लगाया है। इतना ही नहीं सिंधिया के ही लोगों द्वारा उक्त जमीनों को बेचने का भी आरोप लगाते हुये किन किन नौकरशाहों ने उक्त कार्य को अंजाम दिया उसे सामने लाने को कहा है। साथ ही शिवराज सिंह चौहान द्वारा शपथ लेने के तत्काल बाद पूर्व केन्द्रीय मंत्री के विरूद्ध ईओडब्ल्यू मेें दर्ज प्रकरणों को तत्काल प्रभाव से बंद क्यों कराया इसका खुलासा करने को भी कहा है।
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता केके मिश्रा, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा, कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुरारीलाल दुबे ने संयुक्त रूप से पत्रकारों को बताया कि पूर्व सीएम कमलनाथ को जब सिंधिया द्वारा लगातार भू माफिया की जानकारी मिली तो उन्होने जमीनों के खेल की पूर्ति करने से सिंधिया को मना किया इसी के बाद सिंधिया ने एक निर्वाचित सरकार को भाजपा के सहयोग से गिरा दिया। मुरारीलाल दुबे ने दस्तावेजी सबूतों के आधार पर बताया कि सिंधिया राज परिवार ने भारत में विलय के समय जो जमीनों आदि की सूची दी थी, उसके बाद छोडी गई जमीनों पर भी अवैध रूप से अर्जित करना शुरू कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वह खसरा नंबर जो 1989 तक सरकारी दस्तावेजों में नजूल के नाम पर रिकार्ड में दर्ज थे आज उनके (सिंधिया के) नाम पर पंजीकृत अप्रजीकृत न्यासों में कैसे तब्दील हो गये।
उन्होंने बारोप लगाया कि करोडों अरबों रूपये के इस घोटाले में सिंधिया परिवार ने राजनैतिक रसूख और नौकरशाहों के साथ मिलकर अंजाम दिया है। उन्होंने कहा कि सिंधिया परिवार की रूचि जन सेवा की न होकर भूमि के खेल में रही है। उन्होंने बताया कि भूमि के लिये जिन ट्रस्टों का उपयोग किया उनमें से कई ट्रस्ट तो पंजीकृत भी नहीं हैं। 1968 से 2005 तक संचालित विभिन्न 21 ट्रस्टों की जानकारी मांगने पर पता चला कि इनमें से मात्र 4 ट्रस्ट पंजीकृत हैं वह सब 14 अप्रैल 2011 को एक ही दिन पंजीकृत हुये थे। नेताओं ने सिंधिया से यह भी बताने की मांग की कि वह बतायें कि ग्वालियर के मध्य क्षेत्र मेंं स्थित जमीन को अलग अलग दरों पर प्रति बीघा क्यों और किस लिये बेचा गया। उन्होंने कहा कि शासकीय भूमि को सिंधिया परिवार के सदस्यों ने फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से क्यों दर्ज करवाया और उसे मात्र एक माह बाद बेच दिया। नेताओं ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मांग की है कि यदि भू माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने के वह वास्तविक पक्षधर हैं तो उन्हें उक्त प्रमाणित तथ्यों की सूक्ष्म जांच कराकर जनसेवा के नाम पर अपने पास बैठने वाले राजनैतिक लुटेरों को बेनकाब करना चाहिये।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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