बुराई को भूलने से होती है जीवन में धर्म की शुरुआत - मुनिश्री

Sep 08 2020

गवालियर। व्यक्ति के जीवन में धर्म की शुरुआत यानी धर्म का शुभारंभ 'बुराई को भूलनाÓ सीखने से होगी। धर्म के निकट आना है या जाना है तो हर प्रकार के बुरेपन को भुलाएं यानी बुराइयां त्यागें, तभी हम धर्मात्मा बन सकते हैं। भगवान महावीर ने बोधि के अनेक सूत्र दिए हैं। यह उन्हीं के लिए लागू होता है जो उनकी कक्षा को ज्वाइन करना चाहता है। भगवान महावीर का विद्यार्थी बनना बहुत बड़ा सौभाग्य है। यह विचार क्रांतिकारी मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज ने  सोनागिर स्थित आचार्यश्री पुष्पदंत सभागृह में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही।
  मुनिश्री ने कहा कि जैन होने का मतलब भगवान महावीर का विद्यार्थी बनना है। जिंदगी की जितनी भी विपरीत परिस्थितियां व्यक्ति की परीक्षा की घडिय़ां ही होती हैं। सुख अमीर-गरीब शिक्षित-अशिक्षित यानी सभी को चाहिए। साथ ही सुख हमेशा 12 माह 24 घंटे चाहिए, सुखी को सभी पसंद भी करते हैं।
मुनिश्री ने कहा कि माता—पिता बच्चों के जन्म के साथ ही होते हैं, कर्म के नहीं। जीवन के सुख-दुख का हिसाब उन्हें पूरा करना पड़ेगा। मय उदाहरण के रमणीकमुनिजी ने कहा, हर व्यक्ति को कर्म तो भोगने ही पड़ेंगे। वहीं किसी ने बुरा किया और आपने भी यदि बुरा करके किया तो कर्म बंध और बनेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सच्चा प्रतिक्रमण, सच्ची सामायिक तभी होगी जब प्रभु महावीर के नियमों को हम अपनाएंगे।
चातुर्मास समिति के प्रचार संयोजक सचिन जैन आदर्श ने बताया कि मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज के मंगल प्रवचन प्रतिदिन होंग। वही रविवार को दोपहर 3 बजे से विशेष धर्म सभा का आयोजन भ_ारक कोठी के सामने अमोल वाली धर्मशाला के आचार्य पुष्पदंत सागर सभागृह में आयोजन किया जाएगा।