ईकोग्रीन ने नहीं उठाया शहर से कचरा, लगे गंदगी के ढेर

Sep 07 2020

ग्वालियर। 256 करोड़ का प्रोजेक्ट भले ही चाइना की ईकोग्रीन कंपनी ने हथिया लिया हो, लेकिन सच यह है कि इसका कामकाज आरंभ से ही विवादों में रहा है, 12 माह में कम से कम 12 बार कर्मचारी वेतन को लेकर हड़ताल करते हैं, यही नहीं निगम अधिकारी भी कंपनी की इस विसंगति को गंभीरता से नहीं लेते। सोमवार को फिर कंपनी की गाडिय़ां सड़क पर नहीं आने से शहरभर में कचरा पसरा हुआ है और लोग परेशान हैं, कई दुकानों के आगे इतना कचरा जमा हो गया है कि वह दुकान तक नहीं खोल पा रहे, इसके बावजूद क्षेत्रीय प्रबंधक का कहना है कि सब ठीक है, वहीं कर्मचारी कह रहे हैं कि उन्हें वेतन नहीं मिला तो कैसा काम।          
शहर में बढ़ती गंदगी और निगम व ईकोग्रीन कंपनी के बीच सामंजस्य बिठाने के लिए निगमायुक्त ने निर्देश दिए थे कि सुबह उपायुक्त सत्यपाल सिंह चौहान और ईकोग्रीन के क्षेत्रीय प्रबंधक साथ में मॉनिटरिंग करेंगे, लेकिन यह प्वाइंट कार्यक्रम एक ही दिन चला अब फिर सारी जि मेदारी निगम ही उठा रही है।             
ईको ग्रीन कंपनी द्वारा शहर से कचरा समेटने के लिए अनुबंध अनुसार 168 गाडिय़ां लगाई गईं हैं, यह कचरे को उठाकर लैंडफिल साइट पहुंचाती हैं। वहीं कचरा एकत्र करने का काम निगम के सफाई कर्मचारियों पर है। रविवार को साप्ताहिक अवकाश होने के कारण शहर में कचरा पड़ा रहा, वहीं  सोमवार को फिर जब कचरा नहीं उठा तो यह दौगुनी सं या में शहर में पसरा दिखा, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई। हालांकि निगम ने अपने कर्मचारी और गाडिय़ां कचरा समेटने और भरने के लिए लगा दी हैं, लेकिन यह अपर्याप्त साबित हो रहीं हैं। जहां सुबह नौ बजे तक शहर से कचरा उठ जाना चाहिए, वहीं 11 बजे तक हालात खराब बने हुए थे।               
ऐसे तो आ गए नबर वन
सबसे बड़ा सवाल यह है कि हाल ही में स्वच्छता रैंकिंग में ग्वालियर को देश में 13 वां मप्र में तीसरा स्थान हासिल हुआ है और निगम के अधिकारी इससे न सिर्फ बेहद गद-गद हैं, बल्कि शहर को एकनंबर पर लाने का सपना संजो रहे हैं, लेकिन शहर में जो हालात बन रहे हैं वह निगम अधिकारियों के इस मंसूबे पर पानी फेर सकते हैं। फिलहाल के जो हालात हैं, उसे देखा जाए तो निगमकर्मी पहले से सुधरे हैं, लेकिन ईकोग्रीन कंपनी का यह असहयोग भारी पड़ सकता है।
भुगतान नहीं होता पूरा
इधर ईकोग्रीन कंपनी का कहना है कि उसे भुगतान के रूप में मात्र 35 लाख रुपए मिलते हैं, उधर निगम के अधिकारी कह रहे हैं कि जिस रकम की बात ईकोग्रीन कंपनी द्वारा की जा रही है, वह 16 नगर पालिकाओं के लिए है, फिर ग्वालियर नगर निगम उसके लिए रकम अदा क्यों करेगा, वहीं इसमें ग्रामीण क्षेत्र भी शामिल है।