मनुष्य को क्रोध पर काबू और क्षमा, समता का भाव रखना चाहिए - मुनिश्री

Sep 02 2020

ग्वालियर। मनुष्य को भी क्रोध, मान, माया पर विजय प्राप्त करने के लिए विरोधियों को क्षमा समता का भाव रखना चाहिए। जिससे मनुष्य का कल्याण हो सके।  क्रोध ऐसी बीमारी है जिससे सभी परेशान रहते हैं   क्रोध से कैंसर, हार्ट अटैक आदि बीमारियां होती हैं जब भी  क्रोध आए तो हम वह स्थान छोड़ दें और उल्टी गिनती शुरु कर दें और जल ग्रहण करें जब भी  क्रोध आ जाता है तो हम बाद में क्षमा मांग लें "आई एम सॉरी" कहना ही पर्याप्त नहीं होता है क्षमा पवित्रता है सहिष्णुता है अहिंसा की हरियाली है! यह विचार मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज ने आज पर्यूषण पर्व के अंतिम दिन सोनागिर स्थित आचार्यश्री पुष्पदंत सभागृह में संबोधित करते हुए कही।
मुनिश्री ने कहा कि आत्मा की खुशहाली है क्षमा सबसे महान तप है ध्यान है स्वाध्याय है जीवन भर पूजा पाठ किया पर  क्रोध नहीं छोड़ा तो व्यर्थ है "क्षमा फूल है कांटा नहीं क्षमा प्यार है चांटा नहीं " क्रोध करने से कोई महान नहीं होता है क्षमा से महानता मिलती है  क्रोध से दुश्मन को मारा जाता है क्षमा से दुश्मनी को मारा जाता है "क्षमा करने वाला रात भर सोता है  क्रोध करने वाला रात भर रोता है" क्षमा हम उनसे मांगते हैं जिनसे हमारा कुछ भी बैर नहीं है क्षमा उनसे मांगे जिनसे हमारा कभी विवाद हुआ या कहासुनी हुई हो वर्ष में एक बार क्षमा मांगने से कुछ नहीं होता है 15 दिन और माह और छह माह में क्षमा अवश्य मांगे नहीं तो दुर्गति होती है।
 कलशों के जल की धार से भगवान अभिषेक कर शांतिधारा की गई 
चातुर्मास समिति के प्रचार संयोजक सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि क्रांतिवीर मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज पावन सानिध्य में पर्यूषण पर्व पावन बेल में समाजजनों ने शुद्ध जल से कलशों की धार से भगवान जिनेंद्र का अभिषेक किया गया। जिसमें शांति धारा करने का सौभाग्य नरेश चौधरी परिवार डबरा को मिला। आचार्य श्री धर्म भूषण महाराज एवं मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज के पादप्रक्षालन, शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य श्री कोमल चन्द्र जैन डाबर ने प्राप्त किया।