महानिर्वाण लाडू महोत्सव एवं सामूहिक क्षमावाणी कार्यक्रम आज
Aug 31 2020
ग्वालियर। जैन सिद्धक्षेत्र सोनागिर पर पर्यूषण पर्व की पावन बेला अनंत चतुर्दशी पावन पर्व पर आचार्यश्री धर्म भूषण जी महाराज के पावन सानिध्य में एवं क्रांतिवीर मुनिश्री प्रतीक सागर महाराज के निर्देशन में 01 सितंबर को भट्टारक कोठी के सामने आचार्य पुष्पदंत सागर सभागृह अमोल धर्मशाल में सर्व दोष प्रायश्चित महामंडल विधान, महानिर्वाण लाडू महोत्सव एवं सामूहिक क्षमावाणी समारोह कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा।
चातुर्मास समिति के प्रचार मंत्री सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि कार्यक्रम आयोजन आचार्य पुष्पदंत सागर चातुर्मास समिति एवं दिगंबर जैन जागरण युवा संघ रजिस्टर मुंबई, एवं विशेष सहयोगी सकल दिग बर जैन समाज ग्वालियर, डबरा, करेरा, ओर निवेदक श्री दिगंबर जैन भट्टाराकोठी सोनागिर की ओर से कार्यक्रम प्रात: 7-30 बजे जिन अभिषेक नित्य नियम पूजन दोपहर 1 बजे से सर्व दोष प्रायश्चित विधान दोपहर 3 बजे भगवान वासुपूज्य महानिर्वाण लाडू महोत्सव शाम 6 बजे सामूहिक क्षमावाणी समाहरो एवं शाम 6-30 बजे 108 दीपों से महाआरती संगीतकार सौरभ जैन एन्ड पार्टी (मुरैना) कराएगी। जिसमे आप सभी इष्ट मित्रों सपरिवार इस महा आयोजन में सादर आमंत्रित हैं
आकिंचन धर्म स्वयं के अस्तित्व का बोध कराने वाला है-मुनिश्री
सोनागिर- आकिंचन वृत्ति आत्मा का स्वभाव है और जितने भी आत्मा के स्वभाव हैं वह धर्म कहलाते हैं। स्वभाव धर्म को प्राप्त करने के लिए क्रम-क्रम से आगे बढऩे की प्रक्रिया व्यवहार धर्म कहलाती हैं। आकिंचन का अर्थ है कि जो हमारा नहीं उसे तथा उसके प्रति आसाक्ति रूप भावों को भी छोड़ देना। यह आकिंचन धर्म स्वयं के अस्तित्व का बोध कराने वाला है। जिसको हम अपना मानते हैं वह वस्तु या प्राणी कोई भी अपना सगा नहीं है ये सदा साथ नहीं देते! यह विचार क्रांतिकारी मुनि श्री प्रतीक सागर महाराज ने पर्युषण पर्व महोत्सव के आज नौवें दिन अमोल वाली धर्मशाला के आचार्य पुष्पदंत सागर सभागृह में उत्तम आकिंचन धर्म पर सभा को संबोधित करते हुए कही।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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