गर्मी और उमस से बेचैनी बढ़ी

Aug 31 2020

ग्वालियर। शहरवासी फिलहाल एक सप्ताह तक तो जोरदार बरसात की आस न पालें, क्यंोंकि कोई भी सिस्टम शहर के आसपास तक मौजूद नहीं है। यह जरूर है कि तीन सितंबर को एक सिस्टम राजस्थान में जरूर बनेगा, लेकिन यह बूंदाबांदी से आगे नहीं बढ़ पाएगा। इस बीच लोकल हीट भी टुकड़ों में बरसात करवा सकती है। यह बात मौसम विभाग पूरी दमदारी से कर रहा है, वहीं सुबह से खिली चटक धूप ने गर्मी बढ़ाने के साथ ही उमस भी पैदा की है, जिससे बेचैनी बढ़ गई है। कमोवेश अब फिलहाल हालात ऐसे ही रहने वाले हैं। यदि बीच-बीच में बूंदें गिरी तो फिर उमस और अधिक परेशान करेगी। दिक्कत की बात यह है कि अब शहर में बरसात को लेकर ज्यादा आस पालना भी बेमानी है इस तरह के संकेत मौसम विभाग दे रहा है।                   
कम बरसात का असर केवल शहर और ग्रामीण अंचल पर ही नहीं पड़ा है, बल्कि शहर की प्यास बुझाने वाला तिघरा जलाशय भी अपान जल स्तर बढ़ाकर बाहर पैर पसारने के लिए बीते सात दिन से इंतजार कर रहा है। इसके कैचमेंट एरिया घाटीगांव और मोहना तक में पानी नहीं गिरा है, जिससे ककेटो और पेहसारी डैम भी नहीं भर सके हैं। तिघरा प्रभारी सब इंजीनियर संतोष तिवरी का कहना है कि फिलहाल चार दिन से तिघरा में पानी की बूंद तक नहीं आई है और इसका जलस्तर 737.30 फुट पर अटका है, जबकि जुलाई-अगस्त में ही इसे लबालब हो जाना चाहिए था।   
बढ़ रहे सूखे के हालात
अब मानसूनी सीजन के लिए केवल शहरवासियों के पास सितंबर का माह ही शेष है। यदि कोई सिस्टम बनता भी है और कारगर सिध्द नहीं होता तो फिर प्रदेश के अन्य जिले जहां बाढ़ की परेशानी के लिए जाने जाएंगे, वहीं ग्वालियर सूखाग्रस्त घोषित होगा। केवल एक सिस्टम बंगाल की खाड़ी से आने की आस है, यदि इसे भी माकूल परिस्थिति नहीं मिलीं तो फिर यह भी सागर की ओर कूच कर जाएगा और शहर की जेब पानी को लेकर खाली ही रहेगी। यदि आंकड़ों के हिसाब से देखा जाए तो हालात इस तरह के परिदृश्य को साफ दिखा रहे हैं। 24 घंटे में शहर में मात्र 10.2 मिलीमीटर पानी ही गिरा है, जिससे सीजनेबल बरसात 467. 1 मिलीमीटर तक ही पहुंची है, जबकि मानसून के तीन माह बीत चुके हैं और शहर की बरसात का औसत आंकड़ा ही 790 मिलीमीटर है।