जंगल है तो मंगल है

Aug 28 2020

ग्वालियर। हम सभी अमंगल शब्द सुनते ही कितने विचलित हो जाते हैं परंतु हम सब ने अपनी धरती माता का अमंगल ही किया है हरियाली से   आच्छादित धरती को षड्यंत्रो तथा भू माफियाओं द्वारा धरती का अमंगल ही करते चले आ रहे हैं जंगल में रहने वाले जीव जंतु लुप्त होने के कगार पर पहुंच चुके हैं नष्ट होते जंगलों के कारण जंगली जीव शहरों की ओर कभी कभार आ जाते हैं तो हम उल्टा दोष उन पर लगा देते हैं कि जंगल छोड़कर शहरों की ओर आ जाते हैं अरे नादानो जब हमने उनके जंगल नष्ट कर दिए उनके जंगलों में घुसपैठ कर दी असली घुसपैठियों तो हम ही हैं जो उनके जंगल काट दिए अभी भी वक्त है संभलने का प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए पर्यावरण को बचाने के लिए एक ही मुहिम एक ही संदेश जंगल है तो मंगल है