आचार्य प्रसन्न सागर ने 50 दिन बाद अन्नजल ग्रहण कर पारणा किया

Aug 17 2020

ग्वालियर। पुष्पगिरी तीर्थ प्रणेता आचार्य श्री पुष्पदन्त सागर जी महाराज के आत्मीय शिष्य भारतगौरव तपाचार्य अन्तर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज द्वारा अपनी साधना को गति प्रदान करते हए जैन धर्म के महाकाव्य भक्तामर जी के 50 दिन के अखण्ड(लगातार) कठिन उपवास व मौन व्रत की बिना किसी से मिले साधना की है। जिनकी सफलतम साधना के पूर्ण होने पर संघत मुनि श्री पीयूष सागर जी महाराज के निर्देशन में ग्वालियर सहित देशभर के गुरुभक्तो ने अपने अपने घरों व जिनमंदिरों में भक्तामर पारणा अनुमोदना महोउत्सव के रूप में मनाया। गौरतलब है कि इस समय पूज्य गुरुदेव का मंगल चातुर्मास मंशापूर्ण महावीर तीर्थ क्षेत्र गंगनहर मुरादनगर उत्तर प्रदेश में चल रहा है। 
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि गुरूदेव के अन्यय भक्त प्रशांत गंगवाल, प्रियांक सोनी, अजित कासलीवाल, अनिल पाटोदी, राजेश पाटोदी, अंतर्मन गुरु भक्त परिवार ग्वालियर आदि भक्तों ने अपने गुरु की साधना से उत्साहित भक्तो ने ग्वालियर सहित देशभर के गुरुभक्तों ने अपने अपने घरों व मंदिरों में उपवास की अनुमोदना स्वरूप भक्तामर महाकाव्य का पाठ कर देश मे 1 लाख 80 हजार से ऊपर पाठ का रिकार्ड बनाया।
 50 दिनों के बाद पारणा भक्तों ने कराया 
प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि आचार्यश्री प्रसन्न सागर महाराज सोमवार को अपने उपवास की साधना को विराम देते हुए 50 दिन बाद त्यागी व्रतियों व नियमो से संकल्पित भक्तो से विधि पूर्वक अन्नजल ग्रहण कर पारणा किया। इस अवसर पर देशभर के गुरुभक्त पारणा (अन्नजल ग्रहण करना) उत्सव देखने पहुँचे। जानकारी देते हुए नरेंद्र अजमेरा पीयूष कासलीवाल रोमिल जैन ने बताया कि गुरुदेव इसके पूर्व भी 16,32, 35, 64, व 186 दिन के कठोर उपावस व मौन व्रत की साधना कर चुके है।
अपनी तप आराधना, मौन व्रत ओर एकान्तवास को लेकर अन्तर्मना ने बताया कि," मौन अनेक समस्याओं का समाधान है मौन का अर्थ है विचारों और विकल्पों के बाजार से पूर्वाग्रह( अतीत के विचार में जुझना) के दुराग्रह (हठाग्रह जिद) से मुक्त होना। हमारी मन की अशांति को विचार और विकल्प ही अशांत और गंदा करते है। मौन रहने से दो पापो से बचा जा सकता है पहला निंदा आलोचना दूसरा हम असत्य के संभाषण से बच जाते है। अब मौन में ही रमने को मन करता है बाहरी वातावरण सुधरने वाला नही है दिन प्रतिदिन चारित्र में, नैतिक मूल्यों का पतन बढ़ता ही जा रहा है मेरे जीवन मे ये पाँच बाते मौन,  मंत्र, माला, मानस ओर मुस्कुराहट.....सुख शांति प्रदान करता है।