प्रियंका में नहीं तलाशना चाहिए इंदिरा गांधी

Jul 20 2019
फिलहाल भारतीय राजनीति में सबसे बुरे दौर से गुजर रही कांग्रेस पार्टी की महासचिव रही श्रीमती प्रियंका वाड्रा में पूर्व प्रधानमंत्री की तलाश कर रही है। बिना अध्यक्ष के चल रही कांग्रेस में प्रियंका में इंदिरा गांधी की छवि देखने वालों को समझना होगा की इंदिरा गांधी दो बार जन्म नहीं ले सकतीं एइंदिरा गांधी कोई दूसरा हो ही नहीं सकता ।
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में हुए नृशंस गोलीकांड के विरोध में मौके पर जाने के लिए निकली प्रियंका यूपी पुलिस की हिरासत में है ।प्रियंका ने जमानत के लिए निजी मुचलका देने से इनकार कर दिया और मिर्जापुर जिले के एक गेस्टहाउस में ठहरींए जहां उन्हें अपने समर्थकों के साथ सड़क पर बैठने के बाद ले जाया गया। वह लगातार मांग करती रहीं कि उन्हें पीड़ित परिवारों से मिलने और आगे बढ़ने की अनुमति दी जाए।प्रियंका की इस पहल को कांग्रेसी कार्यकर्ता और कांग्रेस के शुभचिंतक इंदिरा गांधी की बेलछी यात्रा की तरह मानकर चल रहे हैं।
राहुल गांधी के कंधा डालने के बाद कांग्रेस को सोनभद्र काण्ड यूपी सरकार के साथ भाजपा को घेरने और कांग्रेस को दोबारा खड़ा करने के लिए सुनहरा अवसर है आपको याद होगा कि 1977 में मतदाताओं द्वारा ठुकरायी गयी श्रीमती इंदिरा गांधी इस हादसे के बाद पहली बार सार्वजनिक मंच पर अवतरित हुईं थीं एमारे गये हरिजनों की पीर से व्यथित वह एक बड़े हुजूम के साथ कीचड़.पानी पार कर बेलछी पहुंची थीं लेकिन उनकी यह बहुप्रचारित यात्राए पीड़ित हरिजनों के आंसू पोंछने के बजाय सत्ता प्राप्ति की एक महत्वपूर्ण सीढ़ी साबित हुई थी एकांग्रेस को लगता है कि सोनभद्र भी कांग्रेस के लिए बेलछी साबित हो सकता है और प्रियंका भी इतिहास दोहरा सकतीं हैं ।
कांग्रेस और प्रियंका के रिश्ते पारिवारिक हैं लेकिन अभी जी तौर पर प्रियंका ने कांग्रेस के लिए कोई उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल नहीं की है। लोकसभा चुनाव में उनके पदार्पण से लगा था कि वे भाजपा की आंधी को रोकने में प्रभावी भूमिका अदा कर पाएंगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ।उत्तर प्रदेश ने ही उनके नेतृत्व और मौजूदगी को नकार दियाएयहां तक कि उनके भाई राहुल गांधी रायबरेली से चुनाव हार गए ।राहुल का चुनाव हारना भी एक इतिहास बन जाएगा और प्रियंका का आना भी एक्योंकि इस समय भाजपा नेतृत्व जिस आक्रामकता से सियासत कर रहा है प्रियंका उसके सामने शायद ही ठहर पाएं ।केवल इंदिरा गांधी से मिलते.जुलते नाक.नक्श के बूते वे सियासत की पुरोधा नहीं बन सकतीं एवे या तो पार्टी की कमान सम्हालें या घर बैठें एउनके लिए बीच का कोई रास्ता नहीं है ।
लोकसभा चुनाव में अपेक्षित बढ़त न बना सकी कांग्रेस के लिए हर कदम पर और हर राज्य में चुनौतियां हैं ।कर्नाटक से लेकर जहाँ भी नजर डालिये कांग्रेस हासिये पर है।देश में जहां कांग्रेस की सरकारें हैं वहां भी पंजाब को छोड़ किसी अन्य राज्य में कांग्रेस अभी अपपनी ढंक कायम नहीं कर पायी है उलटे हर जगह अराजकता की झलक देखने को मिल रही है ।पंजाब में नवजोत कांग्रेस की लौ धीमी करने में लगे हैं तो मध्यप्रदेश में कमलनाथ कोई चमत्कार नहीं कर पाए हैं।उनसे जनता के साथ.साथ मीडिया भी नाखुश है ।छत्तीसगढ़ में भी अभी कांग्रेस के पांव जमे नहीं हैं ।गोवा कांग्रेस पहले ही गंवा चुकी है ।बिहार में कांग्रेस पहले से नदारद है ।समस्या ये है कि एक प्रियंका कैसे पूरे देश में भरभराती कांग्रेस को जीवनदान दे सकतीं है घ्
कांग्रेस को इंदिरा गांधी के बाद श्रीमती सोनिया गांधी ने जो नेतृत्व प्रदान किया उसकी मिसाल लगातार पेश की जाएगी।इस मामले में लोग और कांग्रेसी राजीव गांधी को भी उतनी तीव्रता से याद नहीं करते जितना की सोनिया को करते हैं एलेकिन कुछ उम्र का तकाजा और कुछ समय की बलिहारी की श्रीमती सोनिया गांधी भी अब कांग्रेस के लिए इतिहास बनती जा रहीं हैं ।उन्होंने बड़ी मेहनत और धैर्य के साथ पार्टी में अपने बेटेराहुल गांधी के लिए जगह बनायी थी लेकिन राहुल अपेक्षित परिणाम नहीं दे सके ।अब दारोमदार उनकी बहन प्रियंका पर है एवे समय रहते पार्टी की बैशाखी बनतीं हैं तो ठीक अन्यथा कांग्रेस में जारी भगदड़ खतरनाक स्तर तक पहुँच जाएगी ।संगठन के स्तर पर कांग्रेस तिरोहित हो चुकी है अब विचारधारा के स्तर पर उसे बचाये रखना ही कांग्रेस के दृश्य.अदृश्य नेतृत्व की सबसे बड़ी चुनौती है
कांग्रेस के भूत.भविष्य को लेकर मै पहले भी अपनी बात सामने रख चुका हूँ एअब मुझे लगता है कि कांग्रेस को समय गंवाए बिना अपना नेतृत्व जनता और कार्यकर्ताओं के सामने लाना चाहिएएअन्यथा जितनी अधिक देर होगी नुकसान उतना अधिक होगा ।कांग्रेस का नुक्सा विपक्ष का नुक्सान है एसंसदीय गणित का नुक्सान है ।देश में इस समय पूरब से पश्चिम तक और उत्तर से दक्षिण तक जितने भी छोटे.बड़े राजनितिक दल है उनमने आज भी कांग्रेस ही एकमात्र ऐसा दल है जो अघोषित रूप से विपक्ष की हैसियत रखता है।कांग्रेस के अलावा फिलहाल सब क्षेत्रीय हैसियत वाली राजनितिक पार्टियां भाजपा के लिए कभी चुनौती पेश नहीं कर सकतीं एभाजपा उन्हें धीरे.धीरे या तो समाप्त कर देगी या उन्हें अपने में शामिल करती जाएगी।एक कांग्रेस को ही हजम करना भाजपा के लिए टेढ़ी खीर है ।
प्रियंका गांधी के पास सियासी विरासत है लेकिन मैदानी अनुभव नहीं एउनके साथ उनके पति राबर्ट वाड्रा का बदनाम नाम भी जुड़ा है एइंदिरा गांधी की तरह वे अभी अपने पति के नाम की छाया से मुक्त नहीं हैं और न ऐसा कर पाना उनके लिए आसान है। भाजपा प्रियंका को परोक्ष रूप से उनके पति के जरिये ही घेरने के प्रयास करती आयी है और आगे भी करती रहेगी एऐसे में प्रियंका के लिए कांग्रेस के लिए काम करना हासन नहीं होगा ।बावजूद इसके प्रियंका अपने आपको चाहें तो तैयार कर सकतीं हैं कांग्रेस की पतवार थामने के लिए ।यदि वे पार्टी की कमान नहीं सम्हालतीं तो उनका राजनीति में कोई भविष्य नहीं है ।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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