-आदिनाथ पनिहार मंडल की तैयारिय को लेकर बैठक एवं पोस्टर विमोचन किया पनिहार में आदिनाथ जंयती पर भक्तामर विधान महामस्तकाभिषेक एवं विशाल मेला आयोजित होगा

Mar 18 2019


  ग्वालियर- शिवपुरी मार्ग पर पनिहार गाँव में परम श्रद्धेय धर्मयोगी गुरुदेव (डॉ) क्षुल्लक रत्न श्री योगभूषण जी महाराज के मंगल सानिध्य में 29 मार्च को भगवान आदिनाथ जंयती पर 29 मार्च से 31 मार्च तक तीन दिवसिय 1008 कलशों से दिव्य सहस्रधारा महा-मस्तकाभिषेक महोत्सव एवं विशाल मेला व षोभायात्रा का ऐतिहासिक आयोजन किया जा रहा है। 
तीन दिवासिया कार्यक्रम के पोस्टर किया विमोचन 
  आदिनाथ पनिहार मंडल की बैठक तैयारियो को लेकर नई संडक स्थित तेरापंथी धर्मषाला में आयोजित ंिक गई। बैठक में मंडल के अध्यक्ष अनूप सौगनी, महामंत्री राजेष जैन लाला, पनिहार कमेटी के कोशाध्यक्ष गुलाजारी लाला जैन एवं मेला संयोजक निर्मल पाटनी ने तीन दिवासिय होने वाले कार्यक्रम पोस्टर का विमोचन ंिकया गया। इस बैठक में मजू पाटनी, अंजली जैन, अनिता जैन, मनीशा जैन, आषा जैन, ममता जैन, महेन्द्र जैन, वीरेन्द्र जैन, अलोक जैन, दीपक जैन, दिनेष जैन, राजीव जैन, अजय जैन, संजय गिराधववाल, जगदीष जैन, आदि उपस्थित थे।
तीन दिवसिय महाराज के सानिध्य मे होगे
   जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन आदर्ष कलम ने बताया ंिक परम श्रद्धेय धर्मयोगी गुरुदेव (डॉ) क्षुल्लक रत्न श्री योगभूषण जी महाराज के मंगल सानिध्य में 29 मार्च से 30 मार्च तक प्रात-8 बजे अभिशेक, षातिधारा, भक्तामर महामंडल विधान होगा। 31 मार्च को प्रात-8 बजे से पनिहार ग्राम से मंदिर से श्रीजी की पालकी षोभायात्रा सिद्धक्षेत्र भौंरा पनिहार पहुचेगी। प्रात 9 बजे से महामस्तकभिशेक, ध्वजारोहण, चित्रआनवरण, ज्योति प्रज्वालित, पूज्य क्षुल्लक जी कव प्रवचन, 48 दिपो से महाआरती करेगे।
 षहरो पहुचेगे श्रद्धालुगण
  जैन समाज के प्रवक्ता सचिन आदर्ष कलम ने बताया कि पनिहार मे महामस्तकभिशे में सम्मालित होने के लिए ग्वालियर और दिल्ली, जयपुर, बैंगलोर, आगरा, मुरैना, भिण्ड, मैनपुरी, शिकोहबाद, शिवपुरी, मेरठ, बडौत आदि अनेक नगरों से हजारों भक्त श्रद्धालु पहुंचेगे।
भूगर्भ से प्रगट हुई जैन प्रतिमाओ का महामश्तकभिशेक होगा
  पनिहार जैन मदिर में खुदाई के दौरान लगभग 1500-2000 वर्ष प्राचीन 11 वीं-12 वीं शताब्दी की श्वेत वर्ण की विशाल अतिशयकारी मनोहारी जिन प्रतिमाएं प्राप्त हुई हैं। श्री आदिनाथ, अजितनाथ, संभवनाथ, सुमतिनाथ, सुपार्श्वनाथ, श्रेयांसनाथ, वासुपूज्य, धर्मनाथ, मल्लिनाथ, मुनिसुव्रतनाथ, नमिनाथ, पार्श्वनाथ एवं महावीर स्वामी की ये प्रतिमाएं हैं। इनमें श्री आदिनाथ भगवान की प्रतिमा सबसे बडी है जिससे उसे ही यहॉं का मूलनायक माना गया है! इनमें से अधिकतर प्रतिमाओं के चिन्ह उल्टे हैं, जो कि तंत्रपीठ होने के संकेत देते हैं।