रागायन की सभा में बिखरे बसंत फागुन के सुरमयी रंग

Feb 09 2026

ग्वालियर। शहर की सांगीतिक संस्था रागायन की मासिक संगीत सभा सिद्धपीठ गंगादास की बड़ी शाला में सुर, लय और भाव के अनुपम संगम के साथ सम्पन्न हुई। बसंत और फागुन की रागात्मक छवियों से सजी इस सुरसभा में ध्रुपद, ख्याल और बांसुरी वादन की सजीव प्रस्तुतियों ने वातावरण को पूर्णत: सुरमय कर दिया। शहर एवं बाहर से पधारे कलाकारों की साधना ने संगीत रसिकों को गहरे तक भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री ध्यानेन्द्र सिंह तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शाला के पीठाधीश्वर एवं रागायन के अध्यक्ष स्वामी रामसेवकदास ने माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं गुरु पूजन कर सभा का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ध्यानेन्द्र सिंह ने कहा कि शास्त्रीय संगीत के प्रति युवा पीढ़ी में पुन: जाग्रत हो रहा आकर्षण हमारी सांस्कृतिक परंपरा की सशक्तता का प्रमाण है। 
सभा की प्रथम प्रस्तुति ग्वालियर की युवा ध्रुपद गायिका सुश्री यखलेश बघेल द्वारा दी गई। उन्होंने राग गूजरी तोड़ी में ध्रुपद गायन की सुमधुर एवं गम्भीर प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सभा का समापन पुणे से पधारी विदुषी उर्वशी शाह के शास्त्रीय गायन से हुआ। उन्होंने राग वृन्दावनी सारंग में एकताल में निबद्ध विलम्बित बंदिश ‘न मानूँ सखी री’ तथा तीनताल में द्रुत बंदिश ‘देखो सखी करत मोसे अब’ को अत्यंत भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में संगीत रसिक उपस्थित रहे और देर तक तालियों की गूंज से कलाकारों का उत्साहवर्धन करते रहे।