दिव्यांगजनों को लाभ नहीं दे सकती तो योजनाओं को बंद करें मप्र सरकार-जौहरी

Feb 09 2026

ग्वालियर। शहर जिला कांग्रेस विकलांग कल्याण प्रकोष्ठ के जिला संयोजक एवं वरिष्ठ समाजसेवी औरआरटीआई ऐक्टिविस्ट अनूप जौहरी ने मप्र सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं को सही समय पर नहीं दिये जाकर उनका आर्थिक, मानसिक एवं शारीरिक शोषण किये जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे तो अच्छा है कि मप्र सरकार इन योजनाओं को बंद ही कर दें।
सरकार दिव्यांगजनों को अन्य राज्यों से सबसे कम मात्र छै सौ रुपये बह भी हर माह के अन्त में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा पेंशन उनके खातों में पंहुचा रही है। जिससे ऐसा प्रतीत होता हे कि अब मध्यप्रदेश सरकार को इन दिव्यांग, वृद्ध, विधवा, एवं परित्यागता निराश्रितों की पेंशन बोझ लगने लगी है। हर माह इन निराश्रितों की समाजिक सुरक्षा पेंशन कहीं केवाईसी के नाम पर कहीं समग्र आईडी गलत होने का बहाना बनाकर बन्द की जा रही है। अैर सक्षम लाडली बहिनाओं को सही समय पर पंद्रह सौ रुपये माह दे रही है।
मुख्यमंत्री दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन राशि भी पात्र हितग्राहियों को दो दो तीन तीन साल से बजट नहीं होने का बहाना बनाकर विवाहित दिव्यांग जनों के खातों में विवाह प्रोत्साहन राशि नहीं पहुंचाई जा रही है। दोनों पति-पत्नी दिव्यांग हें तो उन्हें एक लाख रुपए ओर दोनों में से एक दिव्यांग ओर एक सकलांग हे तो उसे दो लाख रुपए, जबकी कागजी कार्यवाही पूरी होने के बाद छै महीने के अन्दर मुख्यमंत्री दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन राशि इनके खातों में पहुंचाय जाने का नियम है। पात्र हितग्राहियों द्वारा सीएम हेल्पलाइन पर भी काफी शिकायतें करने के बाद भी उनकी कोई सुनवाई नहीं है दिव्यांग समाजिक न्याय विभाग के चक्कर लगा लगा कर परेशान हो रहे हे।
अगर सरकार अपनी योजनाओं का लाभ नही दे पा रही हे तो इन योजनाओं को बंद ही करदे तो अच्छा हे कम से कम यह असहाय दिव्यांग जन परेशानियों से तो बचेंगे मध्यप्रदेश सरकार के पास दिव्यांग जनों को कृत्रिम अंग बांटने और अपने, फिजूल के कार्यक्रमों पर पैसा पानी की तरह बहाने के लिए तो बजट ही बजट हे। लाडली बहिनों को सही समय पर पन्द्रह सौ रुपये हर माह देने के लिए कर्ज लेकर बजट हे। मगर इन निराश्रितों को देने के लिए बजट नहीं कुल मिलाकर कमीशन खोरी के लिए बजट ही बजट है।
में पूछना चाहता हूं सरकार से क्या ये निराश्रित इस देश का नागरिक नहीं क्या बह वोट नहीं देता तो चुनावों के समय इनका वोट डलवाने के लिए सरकारें इन्हें पोलिंग बूथ तक ले जाने लाने और इतना ही नहीं चलने फिरने में अक्षम वोटरों के घरों पर ही वोट डलवाने के लिए कर्मचारियों को भेज कर लाखों-करोड़ों रुपए खर्च करना एक दिखावा नहीं तो क्या हे। सरकार यह नहीं भूले इन असहाय निराश्रितों की बद्दुआओं का घड़ा जिस दिन पर जायगा उस दिन भाजपा की सरकार दूर दूर तक दिखाई नहीं देगी।