काली माता प्रांगण पर भूमाफियाओं का साया,चर्चाएं गर्म

Jan 14 2026

भितरवार। नगर के बीचों बीच स्थित काली माता मंदिर प्रांगण पर भूमाफियाओं का साया मंडरा रहा है। एक प्रभावशाली नेता की इस करोड़ों की भूमि पर निगाह जमीं है। पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष सतीश मघैया द्वारा अपने कार्यकाल में अतिक्रमण से मुक्त कराई गई इस भूमि पर कब्जा किए जाने की तैयारी की चर्चा जोरों पर है। वहीं इस कृत्य जानकारी मिलने पर नगर के लोगों में काफी आक्रोश है।
उल्लेखनीय है कि नगर के मुख्य बाजार के वार्ड 7 तहसील मार्ग स्थित काली माता मंदिर के आगे भूमि पर किसी व्यक्ति का कब्जा था। मंदिर प्रांगण की करोड़ों की इस भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए तत्कालीन नगर परिषद अध्यक्ष सतीश मघैया ने प्राथमिता के साथ कार्रवाई शुरू की। बताते हैं कि इस दौरान भूमि पर कब्जा जमाए बैठे व्यक्ति ने श्री मघैया पर राजनैतिक दवाब भी बनाया। बात नहीं बनी तो उक्त व्यक्ति ने एक मोटी रकम (लाखों रुपए) का प्रलोभन भी दिया। राजनैतिक दबाव और रुपए के लालच के बाद भी तत्कालीन नगर परिषद श्री मघैया ने एक नहीं सुनी। और उन्होंने निकाय के अमले को भेजकर काली माता मंदिर के आगे की करोड़ों की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया।
लगभग 12 साल बाद इस भूमि पर कुछ भू माफियाओं की नजर पड़ गई है। निकाय से जुड़े सूत्र बताते हैं। कि एक प्रभावशाली नेता द्वारा मंदिर प्रांगण को कब्जाने के इंतजाम कर लिए हैं। मंदिर प्रांगण में टीन डालकर कब्जा किए जाने की चर्चा नगर में जोरों पर है। निकाय से हरी झंडी मिलते ही भूमि पर कब्जा हो सकता है। बताते हैं कि मंदिर की इस भूमि को लेकर उक्त नेता और स्थानीय निकाय के जिम्मेदारों के साथ कई बार बैठकें हो चुकी हैं।
इनका कहना हैं
काली माता मंदिर भूमि पर एक इंच भी कब्जा नहीं होने देगें। नगर के बीचो बीच करोड़ों की इस भूमि को हथियाने की कोशिश सफल नहीं होने देगें। इस प्रांगण में कई वर्षों से हमारी समिति द्वारा श्री रामलीला का आयोजन किया जाता है।
राजेंद्र दिघर्रा, पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष भितरवार

पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष सतीश मघैया ने एक अतिक्रमण कारी से मंदिर प्रांगण को मुक्त कराया था। जमीन अतिक्रमण मुक्त होने के इस प्रांगण में कई धार्मिक कार्यक्रम होते हैं। हर वर्ष हमारे समाज द्वारा काली मां को विराजमान कर भव्य झांकी लगाई जाती है। इस भूमि पर शासकीय कार्यक्रम भी होते हैं हम प्रांगण पर कब्जा नहीं होने देगें।
सुरेश मेवाफारोस, वरिष्ठ पत्रकार भितरवार