हृदयाघात होने पर 5 से 10 मिनट सीपीआर देकर जान बचाने में सहायक बने
Jan 08 2026
ग्वालियर। सर्दियों में हार्ट अटैक की समस्या सबसे अधिक होती है। इसके लिए एक जीवनरक्षक प्रक्रिया है, जो किसी की दिल की धडक़न रुक जाने पर 5 से 10 मिनट का गोल्डन टाइम सीपीआर देकर जीवन बचाने में सहायक होता है। हृदय स्ट्रोक, अस्थमा, नर्वस ब्रेकडाउन व हायपर टेंशन जैसी प्रतिकूल स्वास्थ्य स्थिति के दौरान रोगियों को अचानक सांस लेने में कठिनाई हो सकती है, जिसके लिए सीपीआर एक मात्र आपातकालीन उपाय है। यह बात माधव महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा सप्त दिवसीय विशेष शिविर के तीसरे दिन ग्रामीण क्षेत्र में सीपीआर प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य प्रशिक्षक एसडीईआरएफ कमांडेंट गोविंद शर्मा ने कही।
कमानडेंट गोविंद शर्मा ने युवाओं को बताया कि सीपीआर के लिए व्यक्ति की छाती पर हाथ की हथेली से 100 से 120 बार एक मिनट में दबाना पड़ता है। हाथ के दबाव से छाती लगभग पांच इच तक दबे और तीस बार सीपीआर के बाद गहरी सांस लेते हुए उसकी नाक को बंद कर मरीज के मुंह में अपनी सांस पूरी छोड़ दें। यह प्रक्रिया दो बार करना चाहिए। इसी क्रम में उन्होंने युवाओं के सवालों के जवाब दिए।
इस अवसर पर जिला संगठक डॉ मनोज अवस्थी, डॉ नीलेंद्र सिंह तोमर, वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉ संजय कुमार पांडे, डॉ सरिता दीक्षित, डॉ राजेश मिश्रा, डॉ दीपक शिंदे, डॉ विजय पांडे, हर्ष पाल, उज्ज्वल गुप्ता, अनंत प्रताप, देवाशीष शर्मा उपस्थित रहे।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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