जीवन जीने की कला सिखाता है राजयोग ध्यान: बीके प्रहलाद
Dec 18 2025
ग्वालियर। आज के तेज, प्रतिस्पर्धात्मक और तनावपूर्ण जीवन में मनुष्य बाहरी सुख-सुविधाओं के बीच भी भीतर से अशांत दिखाई देता है। ऐसे समय में यदि जीवन को खुशनुमा बनाना है, तो थोड़ा समय अपने लिए निकालें और राजयोग ध्यान का अभ्यास करें।
राजयोग न केवल ध्यान की एक पद्धति है, बल्कि यह जीवन को संतुलित, सकारात्मक सोच और आत्म-बल के साथ जीने की कला सिखाता है। यह बात प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय से प्रेरक वक्ता एवं वरिष्ठ राजयोग ध्यान प्रशिक्षक बीके प्रहलाद भाई ने हेलीपैड कॉलोनी में आयोजित राजयोग ध्यान शिविर में कही।
बीके प्रहलाद भाई ने कहा कि जब व्यक्ति स्वयं को शरीर नहीं, बल्कि एक शांत, शक्तिशाली आत्मा के रूप में अनुभव करता है, तब उसके विचार, भावनाएं और व्यवहार स्वत: ही सकारात्मक होने लगते हैं। यही सकारात्मकता आंतरिक ख़ुशी और स्थायी शांति का आधार बनती है। आज अधिकांश भसमस्याओं की जड़ मन की अस्थिरता, नकारात्मक सोच और भावनात्मक असंतुलन है। राजयोग ध्यान विचारों को नियंत्रित करना सिखाता है।
इस अवसर पर ओमप्रकाश अग्रवाल, डॉ केके तिवारी, शम्भू दयाल, रमन, गिर्राज, गिरधारी, संतोष अग्रवाल, राधा, सीमा, राधिका, संगीता, गीता, अवनि, गीता तिवारी, रेखा गंडोत्रा, कंचन गाबरा, नेहा केसवानी, मंजू, सावी, निम्मी नागवानी, मोना, अंकिता सहित अनेकानेक श्रद्धालु उपस्थित थे।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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