विद्यार्थी जीवन में अध्ययन भक्ति की तरह हो-डॉ मनीष खैमरिया
Dec 16 2025
ग्वालियर। मध्य भारतीय हिंदी साहित्य सभा द्वारा सरस्वती शिशु मंदिर गोरखी में भारतीय ज्ञान मीमांसा एवं भक्ति परंपरा पर व्याख्यान सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें अनेक शोधार्थी व युवा साहित्यकार उपस्थित रहे। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ मनीष खैमरिया रहे।
मुख्य वक्ता ने उपस्थित युवाओं को भारतीय ज्ञान मीमांसा की परंपरा से परिचित कराया। अपने व्याख्यान के दौरान डॉ खैमरिया ने वेद, उपनिषद व दर्शन के माध्यम से बताया कि किस प्रकार यह भारत भूमि बहुरत्ना वसुंधरा रही है। छात्रों का स्वाध्यायान्मा प्रमद: की उक्ति से परिचित करवाते हुए अपने अध्ययन को नदी की तरह सतत गतिशील रखने का मार्गदर्शन दिया।
वहीं विशिष्ट वक्ताडॉ मंदाकिनी शर्मा ने युवाओं को बताया कि किस प्रकार भक्ति भारतीय ज्ञान मीमांसा का सर्वोच्च भाग है। भक्ति किस प्रकार से पर्यावरण व समाज सहित संपूर्ण विश्व के कल्याण में मानव को लगाती है। उन्होंने कहा ज्ञान और भक्ति के लिए श्रद्धा होनी आवश्यक है, श्रद्धावान् लभते ज्ञानम्। कृष्ण ने अर्जुन और दुर्योधन दोनों को विश्व रूप दिखाया लेकिन अर्जुन ही उसको स्वीकार कर पाए और उस ज्ञान और भक्ति को पा सके क्योंकि उनके अंदर उच्च मानवीय गुण और श्रद्धा थी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ गोविंद शर्मा ने की। कार्यक्रम का संचालन शिवम सिंह सिसौदिया ने किया। कार्यक्रम में व्याप्ति उमडेकर, पलक सिकरवार, अनुभवी शर्मा, हिमांशु शर्मा और विकास बघेल ने काव्य पाठ किया। कार्यक्रम में मुरार एसडीएम नरेश चंद्र गुप्ता, शिक्षिका ममता गुप्ता, सभा मंत्री उपेंद्र कस्तूरे, गोरखी विद्यालय के सचिव सुमित तिवारी, शिवानी गोस्वामी, विजय किरार, गौरव बघेल, गौरव राजौरिया, शुभम जयसवाल आदि उपस्थित रहे।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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