आयुर्वेद को बढावा देने विश्व शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में 17 से

Dec 09 2025

ग्वालियर। देश की पारंपरिक चिकित्सा पद्धत्ति आयुर्वेद को बढावा देने के लिए इस वर्ष दूसरी बार विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ के मार्गदर्शन में द्वितीय वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन का आयोजन नई दिल्ली के भारत मंडपम के सभागार में 17 से 19 दिसंबर तक आयोजित किया जाएगा। इसकी तैयारियां जोर शोर से चल रही है।
क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान ग्वालियर के सहायक निदेशक एवं संस्थान प्रभारी डा बृजेश सिंह सिसोदिया, अनुसंधान अधिकारी डा अनिल मंगल ने मंगलवार को पत्रकारवार्ता में बताया कि इस वर्ष 17 दिसंबर से होने वाले इस शिखर सम्मेलन का विषय संतुलन बहाल करना: स्वास्थ्य और कल्याण का विज्ञान और अभ्यास है।
उन्होंने बताया कि इस शिखर सम्मेलन में दुनियां भर के मंत्री, नीति निर्माता, वैश्विक स्वास्थ्य नेता, शोधकर्ता, विशेषज्ञ, उद्योग प्रतिनिधि और चिकित्सक शामिल होंगे। वहीं लगभग एक सौ से अधिक देशों की भागीदारी अपेक्षित है। सम्मेलन के समापन समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भी पहुंचने की संभावना है।
ज्ञातव्य है कि इस वैश्विक शिखर सम्मेलन का आयोजन 2023 में गुजरात में किया गया था। केन्द्रीय आयुष राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार प्रताप राव जाधव ने कहा कि सम्मेलन में आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी सहित आयुष प्रणालियों की वैश्विक पहचान पर जोर देते हुये जामनगर में डब्ल्यूएचओ के वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केन्द्र की स्थापना की गई है जो भारत के ज्ञान तंत्र पर बढते भरोसे को दर्शाती है।
उन्होंने बताया कि सम्मेलन में अश्वगंधा पर विशेष कार्यक्रम आयोजित होगा। जिसमें पारंपरिक और आधुनिक स्वास्थ्य पद्धतियों में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला जायेगा। जिसमें अश्वगंधा पारंपरिक ज्ञान से वैश्विक प्रभाव तक विषय पर केन्द्रीय सत्र का आयोजन भी होगा। जिसमें इसके एडाप्टोजेनिक, न्यूरोप्रोटेक्टिव और इम्यूनोमाडुलेटरी गुणों पर नवीनतम वैज्ञानिक साक्ष्य तथा पारंपरिक ज्ञान पर चर्चा की जाएगी। इसका उददेश्य उच्च गुणवत्ता वाले साक्ष्य आधारित अश्वगंधा उत्पादों की वैश्विक स्वीकारता को बढावा देना है।
डब्ल्यूएचओ दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र की क्षेत्रीय निदेशक एमेरिटस एवं डब्ल्यूएचओ महानिदेशक की पारंपरिक चिकित्सा पर वीिष्ठ सलाहकार डा पूनम खेत्रपाल ने बताया कि दूसरा वैश्विक शिखर सम्मेलन पारंपरिक , पूरक, एकीकृत और स्वदेशी औषधियों के साक्ष्य आधारित और सतत एकीकरण के लिए आगामी दशक की रूपरेखा तय करेगा। उन्होंने अनुसंधान , नवाचार और नियामक सुदृढीकरण से साक्ष्य अंतर को पाटने की आवश्यकता पर बल दिया। पत्रकार वार्ता में अनुसंधान अधिकारी डा श्याम बाबू सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।