भारत में गुरुओं का सर्वोच्च स्थान है, इसलिए गुरु परंपरा का अध्ययन करें-प्रेम शंकर
Dec 03 2025
ग्वालियर। गुरु तेगबहादुर ने मानवता, धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए अपने प्रोणों को न्यौछावर कर दिया। भारत में गुरुओं का सर्वोच्च स्थान है, इसलिए गुरु परंपरा का अध्ययन करें, इसे आगे बढ़ाएं और संस्कृति की रक्षा में संगठित होकर खड़े हों। अगर हम मानवता के रक्षक की परंपरा को समाज में लेकर जाएंगे तो एक सामान्य व्यक्ति भी धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह क्षेत्र प्रचारक प्रेम शंकर ने गुरु तेगबहादुर के 350वें शहीद दिवस के उपलक्ष्य में हिंद की चादर विषय पर हुए व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए कही। बाल भवन में हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता गुरुद्वारा दाताबंदी छोड़ ग्वालियर के मुख्य सेवादार बाबा गुरुप्रीत सिंह ने की। इस अवसर पर राष्ट्रोत्थान न्यास के अध्यक्ष विजय गुप्ता, डॉ. एसएस भल्ला, सिख सभा के संभागीय अध्यक्ष एचएस कोचर मंचासीन रहे।
मुख्य वक्ता प्रेम शंकर ने कहा कि भारत की संस्कृति दुनिया की एक अनमोल धरोहर है, जो सभी का भला चाहती है। उसका भाव वसुधैव कुटुंबकम का है। उन्होंने कहा कि हमारे मन के अंदर किसी के प्रति कोई द्वेष नहीं है, सबको लेकर प्रेम है, लेकिन यह सब होते हुए भी हम समझते हैं कि जिसके कारण धर्म को नुकसान हो रहा है, संस्कृति, आत्मीयता, भाईचारा का ताना-बाना टूट रहा है, इसलिए गुरु तेग बहादुर जैसे महान गुरुओं के पुण्य स्मरण को याद करते हुए धर्म और समाज की रक्षा के लिए हर व्यक्ति खड़ा हो।
बाबा गुरुप्रीत सिंह की ओर से आशीवर्चन का वाचन करते हुए गुरुचरण सिंह ने कहा, गुरु तेगबहादुर ने धर्म और समाज की रक्षा के लिए अपने साथियों के साथ शहादत दी थी। उनकी शहादत समाज को प्रेरणा देती है। कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए डॉ. एएस भल्ला ने कहा कि गुरु तेग बहादुर ने मुगल अत्याचार के सामने कभी झुकना स्वीकार नहीं किया और उनकी शहादत ने निर्भयता का भाव जाग्रत किया। संचालन सद्भावना संयोजक पवन शर्मा ने एवं आभार गोविंद राय ने व्यक्त किया।
संपादक
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