जगन्नाथ की भक्ति के समान हैं अनाथ की सेवा: इंद्रदेव महाराज
Nov 12 2025
ग्वालियर। कथा प्रवक्ता महामंडलेश्वर इंद्रदेव महाराज ने इंटक मैदान में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस बुधवार को कहा कि अनाथ की सेवा भगवान जगन्नाथ की भक्ति के समान हैं।
खचाखच भरे कथा पांडाल में हजारों श्रद्धालुओं को कथा अमृत का रसपान कराते हुए उन्होंने कहा कि यदि आपके द्वार पर कोई भिखारी आए तो उसे दुत्कार कर न भगाएं बल्कि यथासंभव उसे दान दें। क्योंकि पता नहीं है नारायण किस रूप में आपको मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि संतों की सेवा सर्वोपरि है। संत सेवा से यश कीर्ति धन वैभव कुल इत्यादि की बढ़ोतरी होती है । उन्होंने कहा कि सत्संग से जब विवेक जागृत हो जाता है तो मृत्यु और दुख का भय खत्म हो जाता है । उन्होंने कहा कि जो हम कर्म करते हैं उसी के अनुसार विधाता हमारा भाग्य लिखता है। भीष्म पितामह की एक गलती से उनके 500 साल के पुण्य क्षीण हो गए और उन्हें 6 माह तक वाणों की शैया पर रहना पड़ा। उन्होंने कहा कि भगवान से हम छोटी-मोटी वस्तुएं ना मांगे भगवान से हम वह करवाए जो इंसान नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि जीवन का एक-एक पल अनमोल है इसलिए यदि एक पल भी मिले तो उसमें राम श्याम को भज लो। भजन से सिर्फ आपका नहीं बल्कि आपके पूरे परिवार का कल्याण हो जाता है। ध्रुव की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने उसके पिता को भी बैकुंठ पद प्रदान किया और ध्रुव स्वयं भूमंडल में ध्रुव तारा बनकर आज भी अपनी चमक बिखेर रहे हैं।
इस मौके पर कथा परीक्षण शशि सुधीर साहब दीपा प्रियांशु शाह इंटक के वरिष्ठ नेता रतिराम यादव राजू राठौर प्रतिभा अशोक जैन विवेक नूपुर नितिन इत्यादि सहित हजारों श्रद्धालु श्रोता मौजूद रहे।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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