भारत का इतिहास जैन धर्म के इतिहास के बिना अधूरा, जैन धर्म ही सीखता है क्षमा याचना:सिंधिया
Sep 09 2025
ग्वालियर। सन्मति सुबल पावन वर्षा योग समिति एवं सकल जैन समाज के द्वारा मंगलवार को नई सडक़ स्थित चंपाबाग बगीची में आचार्यश्री सुबल सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में सामूहिक क्षमावाणी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंचे अतिथि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंच से कहा कि जियो और जीनी दो। मैं पैदाइश से हिंदू हूं लेकिन कर्म से जैन मानता हू, भगवान महावीर के मार्ग पर में जैन नहीं होकर भी उनके रास्ते पर चलने का प्रयास करता हूं। भगवान महावीर स्वामी ने एक संदेश दिया अहिंसा परमो धर्म।
देश के महात्मा गांधी ने भी भगवान महावीर के अहिंसा से ही प्रेरणा ली। भारत का इतिहास जैन धर्म के इतिहास के बिना अधूरा है। जैन धर्म भारत की विचारधारा भारत का दर्शन सिद्धांत जैन धर्म नहीं किया है। मेरे पूज्य पिताश्री पूरे परिवार को मां, बहन, व मुझे जैन मंदिर, जैन गुरुओं पास दर्शन करने ले जाते थे। जैन संतो का आशीर्वाद सिंधिया परिवार के साथ रहता है। जैन समाज की बड़ी विचारा धाराएं हैं इन्हें अपनाए तो विश्व महान बन जाएगा। उन्होंने कहा कि व्यक्ति का जन्म होता है तब वह निर्वस्त्र आता हे और मरण होता हे तब भी निर्वस्त्र जाता है।
सिंधिया ने कहा कि क्षमावाणी पर ओपचारिकता नहीं होना चाहिए कलयुग में लोग पूजा भी ज्यादा करते हैं उसमें भी सरलता नहीं होती। में आज क्षमावाणी पर निवेदन करता हू कि मेरा पूरा परिवार की ओर से जाने अनजाने हुई गलती को क्षमा करे। सिंधिया परिवार दस पीडिय़ों से क्षमावाणी पर्व से संबंध है।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ महिला मंडल ने मंगलाचरण ओर रिद्धि जैन स्वागत नृत्य से किया। इस दौरान सिंधिया का साफा व शॉल ओर स्मृतिचिह्न से सम्मान किया। इस मौके पर पूर्व विधायक मुनालाल गोयल, भाजपा जिलाध्यक्ष राजौरिया मौजूद थे। संचालन विनय कासलीवाल एवं आभार सचिव निर्मल पाटनी ने किया।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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